जानिए इस्लाम में खतना क्यू किया जाता है क्या ये अल्लाह ने कहा था

‘धर्म’ दुनिया भर में मौजूद किसी भी शब्द की तुलना में सबसे मजबूत है, क्योंकि यह इकलौता शब्द किसी भी समय एक बड़ा बदलाव ला सकता है। धर्म कुछ भी कहे, अच्छा या बुरा, लोग उसे मानते हैं तथा उसका सम्मान करते हैं। क्योंकि यह उनकी आस्था एवं विश्वास ही तो है जो उन्हें उस धर्म से जोड़े रखती है।

2. धार्मिक मान्यताएं
आप ऐसा ना सोचें कि धर्म की ओर ऐसा लगाव केवल भारत में ही देखा जाता है, बल्कि देश-विदेश सभी जगहों पर लोगों को अपने धर्म एवं सम्प्रदाय से अटूट लगाव होता है जिसके लिए वे कुछ भी कर सकते हैं। ऐसा कई बार माना गया है कि धर्म के नाम पर लोगों में कुछ अंधविश्वास उत्पन्न हो जाते हैं।
3. रिवाज़ों का सामाजिक रूप
लेकिन कुछ धर्म ऐसे भी हैं जो अपने रिवाज़ों को कुछ इस प्रकार से बनाते हैं जो सामाजिक रूप से भी अपना लिए जाते हैं। इस्लाम धर्म का ‘खतना’ रिवाज़ भी कुछ ऐसा ही रिवाज़ है, जिसे कई लोग बुरा मानते हैं। लेकिन हाल ही में विज्ञान ने इसे हरी झंडी दिखाई है और कहा है कि यह रिवाज़ बुरा नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।
4. खतना या सुन्नत
हाल ही में अमरीका के शिकागो स्थित बालरोग पर शोध करने वाली संस्था ‘द अमरीकन एकेडेमी ऑफ पीडीएट्रिक्स’ ने अपने ताजा बयान में कहा है कि नवजात बच्चों में किए जाने वाले खतना, जिसे इस्लाम में सुन्नत भी कहा जाता है, यह रिवाज़ सेहत के लिहाज से फायदेमंद है।
5. सेहत के लिए फायदेमंद?
जी हां, आपको सुनकर हैरानी हो रही होगी लेकिन शोधकर्ताओं ने सच में यही परिणाम दिया है। और ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, इससे पहले भी समय-समय पर दुनियाभर में कई ऐसे हुए शोध हुए जिन्होंने यह साबित किया है कि खतना इंसान की कई बड़ी बीमारियों से हिफाजत करता है।
6. दर्दनाक प्रक्रिया
लेकिन इतनी दर्दनाक प्रक्रिया फायदेमंद कैसे हो सकती है? खतना या सुन्नत एक शारीरिक शल्यक्रिया है जिसमें आमतौर पर मुसलमान नवजात बच्चों के लिंग के ऊपर की चमड़ी काटकर अलग की जाती है। यह रिवाज़ भारत समेत अन्य कई अरब एवं यूरोपीय देशों में भी निभाया जाता है, लेकिन हैरानी की बात है कि इस समय यूरोपीय देशों में ही यह रिवाज़ बहस का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है।
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7. भारत समेत यूरोपीय देशों में भी
8. वैज्ञानिकों के प्रमाण
अदालत के इस फैसले ने लोगों को हिला कर रख दिया। धार्मिक संदर्भ से कट्टरपंथियों ने इसका जबर्दस्त विरोध भी किया। लेकिन हाल ही में आया अमरीका की इस संस्था का परिणाम इस बहस में घी डालने का काम कर सकता है।
9. बीमारियां कम फैलती हैं
शोधकर्ताओं ने विस्तार से इस रिपोर्ट में बताया है कि जो बच्चे खतना करवाते हैं, उनमें कई तरह की बीमारियां होने की आशंका कम हो जाती है। बेशक यह एक दर्दनाक प्रक्रिया है, लेकिन इसे कराने वाले बच्चे, खासतौर पर छोटे बच्चों के यूरिनरी ट्रैक्ट में होने वाले इंफेक्शन से बचा जा सकता है।
10. गुप्तांग संक्रमण से बचाव
यह संक्रमण पुरुषों के गुप्तांग में कैंसर, यौन संबंधों के कारण होने वाली बीमारियों, एचआईवी और सर्वाइकल कैंसर को बढ़ाता है और खतना करने से यह संक्रमण ना के बराबर ही पनप पाता है। यही कारण है कि अमेरिका की यह संस्था उन अभिभावकों का समर्थन कर रही है जो अपने बच्चे का खतना करवाते हैं।
11. संक्रमण का जोखिम कम होता है
विस्तार से समझाते हुए वैज्ञानिकों ने कहा, ‘खतना किए गए पुरुषों में संक्रमण का जोखिम कम होता है क्योंकि इस प्रक्रिया में लिंग की आगे की चमड़ी को उतार दिया जाता है। इसी चमड़ी की गैर-मौजूदगी में इस स्थान पर कीटाणुओं को पनपने के लिए नमी का वातावरण नहीं मिलता है, जिससे संक्रमण के पैदा होने का सवाल ही नहीं उठता’।
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12. संभोग से भी फैलता है ये संक्रमण
वैज्ञानिकों ने बताया कि यही चमड़ी ना केवल उस पुरुष बल्कि वह जिस भी महिला से संभोग करते हैं उन्हें भी कई बीमारियां प्रदान करती है। शोध के अनुसार महिलाओं में गर्भाशय कैंसर का कारण ‘ह्यूमन पैपिलोमा वायरस’ होता है। यह वायरस लिंग की उसी चमड़ी के इर्द-गिर्द पनपता है जो संभोग के दौरान महिलाओं में प्रेषित हो जाता है।
13. गर्भाशय कैंसर को कम करता है
कुछ समय पहले वर्ष 2002 में ब्रिटिश मेडिकल संस्था द्वारा किए गए एक शोध में यह बताया गया था कि खतने से महिला गर्भाशय कैंसर को बीस फीसदी तक कम किया जा सकता है। खतने से एचआईवी और एड्स से हिफाजत होती है। इसके अलावा इसी संस्था ने मई 2000 के एक आर्टिकल में बताया था कि खतना किए हुए पुरुष में एचआईवी संक्रमण का खतरा आठ गुना कम होता है।
14. पुरुष एवं महिलाओं दोनों पर असर
खतना का पुरुष एवं महिलाओं दोनों को होने वाली बीमारियों से एक बड़ा संबंध बताया गया है। वैज्ञानिकों की मानें तो यह केवल कहने की बात नहीं है, बल्कि एक जाना माना शोध है जो कई लोगों को आधार बनाते हुए किया गया है। जो लोग इसे कराते हैं वे तो बच जाते हैं लेकिन जो नहीं कराते उन्हीं में लिंग कैंसर होने की आशंका दिखाई देती है।
15. जानें बीबीसी ने क्या कहा
एक और अंतरराष्ट्रीय संस्था बीबीसी टेलीविजन, यूगांडा द्वारा नवंबर 2000 में दो जनजातीय कबीलों पर एक बड़ा शोध किया गया था। इसके मुताबिक उस कबीले के लोगों में एड्स नगण्य पाया गया जो खतना करवाते थे, जबकि दूसरे कबीले के लोग जो खतना नहीं करवाते थे, उनमें एड्स के मामले ज्यादा पाए गए।
16. संक्रमण फैलने की आशंका
17. खतना एक सुझाव भी?
18. एचआईवी से बचाव
19. जिम्बाब्वे में हुआ ऐसा कुछ
समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार जिम्बाब्वे की दो मुख्य पार्टियों के कम-से-कम 60 सांसदों ने बारी-बारी से आकर चिकित्सकीय परामर्श लिया और फिर शिविर में जाकर परीक्षण करवाया। अभियान की शुरुआत में बड़ी संख्या में सांसदों ने हिस्सा लेते हुए एचआईवी टेस्ट करवाते हुए इस खतरनाक बीमारी से बचने के लिए खतना करवाने का संकल्प लिया था।
20. धार्मिक रिवाज़ का चिकित्सकीय रूप
यह खबर हैरान करने वाली तो है लेकिन आप देख सकते हैं कि किस प्रकार से एक धार्मिक रिवाज़ ने लोगों को चिकित्सकीय रूप प्रदान किया है। एचआईवी एड्स होने पर लोग दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन एक स्तर पर आकर तो यह दवाइयां भी काम नहीं करतीं। परन्तु वैज्ञानिकों की राय में खतना एक ऐसा इलाज है जिसे समय रहते यदि करवा लिया जाए तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है।





