जंगलों की आग में जलता उत्तराखंड, काबू करने में जुटीं कई टीमें

uttrakhand_650x400_71462164209देहरादून: उत्तराखंड के जंगल में फैलती आग को काबू करने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, राज्य पुलिस, वन विभाग की टीमें लगी हुई हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक, हालात नियंत्रण में हैं। एयरफोर्स के तीन हेलीकॉप्टर्स भी जंगल में पानी का छिड़काव कर आग बुझाने की कवायद में जुटे हैं। स्थानीय लोग भी इस काम में मदद कर रहे हैं। 

एमआई-17 हेलीकॉप्टर लगे हैं आग बुझाने में
भीमताल और पौड़ी में आग बुझाने पहुंची ग्यारह सदस्यों की एयरफोर्स की टीम को भारी धुएं का सामना करना पड़ा। एमआई-17 हेलीकॉप्टरों को भेजा गया था पानी फेंककर आग बुझाने के काम के लिए लेकिन वे जीरो विजिबिलिटी के चलते वापस आ गए।
 

इसरो ने जारी की सैटेलाइट तस्वीरें
उत्तर भारत के हिमालयी राज्यों खासतौर पर उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग तेजी से बढ़ रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान – ISRO के हैदराबाद स्थित नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर ने आज की ताज़ा तस्वीरें जारी की हैं। उपग्रह के आधार पर तैयार की गई तस्वीरों के मुताबिक, बीते 24 घंटे में जिन जगह जंगलों में आग लगी हुई थी वह बढ़कर चार गुना हो गई है। सैटलाइट की तस्वीरों के आधार पर पता लग रहा है कि उत्तराखंड ही नहीं पूरा उत्तर भारत का पहाड़ी इलाका, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश के जंगलों में कुल एक हज़ार जगहों पर आग लगी हुई है। NDTV के साइंस एडिटर पल्लव बागला ने इसरो की ओर से जारी की गई ये तस्वीरें भेजी हैं। इनमें हर लाल डॉट एक एक्टिव फायर लोकेशन को दिखा रहा है।  
केंद्र की ओर से हर संभव मदद का भरोसा
हालात का जायजा लेने के लिए केंद्र की ओर से चार सदस्यीय विशेषज्ञों की एक टीम उत्तराखंड भेजी गई है, जो एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। कल गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तराखंड के शीर्ष अधिकारियों के साथ हालात की समीक्षा की और केंद्र की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।

अब तक 7 लोगों की मौत 15 घायल
करीब 2200 हेक्टेयर जंगल में लगी आग से करीब 800 गांव प्रभावित हैं। अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 15 लोग जख्मी हुए हैं। रजौरी के बथुनी और गैंबर के जंगली इलाकों में भी आग लगी है। इस साल रजौरी की जंगल में आग की यह पहली घटना है।
सांस लेने में हो रही है दिक्कत…
ताजा जानकारी के मुताबिक, मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिन के भीतर हो सकती है बारिश। यदि ऐसा होता है तो इस आग को बुझने में काफी बड़ी मदद मिलेगी। इस वक्त इन इलाकों में इस कदर माहौल हो चुका है कि अल्मोड़ा के एक रिसॉर्ट के मालिक के मुताबिक, सांस लेने में दिक्कत हो रही है, आंखों में जलन है और अस्थमा के पेशंट्स को काफी दिक्कत पेश आ रही है। इस मौसम में आग से कुल 1890.79 हेक्टेयर वन क्षेत्र बर्बाद हो चुका है। आग का यह सिलसिला शुष्क जाड़े के कारण दो फरवरी को शुरू हुआ था।

फरवरी से जंगलों में आग लगने का सिलसिला जारी
प्रधान वन संरक्षक बीपी गुप्ता ने बताया कि उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग के फैलने से एनडीआरएफ की तीन टीमें अल्मोड़ा, गौचर और पौड़ी में आग बुझाने के लिए लगाई गई हैं जबकि एसडीआरएफ की एक टीम नैनीताल में लगाई गई है। इस साल फरवरी की शुरुआत से राज्य के वनों में आग लगने की घटनाएं शुरू हुईं और अभी तक इस तरह की 922 घटनाएं हो चुकी हैं। अलग-अलग घटनाओं में तीन महिलाओं और एक बच्चे सहित छह लोग मारे गए हैं और सात लोग घायल हुए हैं।

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