सुधारगी और चमकेंगी गांवों की दशा: बीजेपी सरकार

सरकार ने गांवों की दशा सुधारने और उसे चमकाने का फैसला किया है, ताकि गांव के लोगों का जीवन स्तर पर सुधर सके। गांवों में स्वच्छता से लेकर बिजली और अन्य मूलभूत जरूरतें मिलेंगी। गांवों के विकास में पंचायती राज संस्थाओं की अहम भूमिका के मद्देनजर कई प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जायेंगे। गांवों की रेल, सड़क और दूर संचार से कनेक्टिविटी को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। संसद में आम बजट पेश करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उन गांवों में पाइप से पेयजल आपूर्ति की घोषणा की, जो पूर्णत: खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं।
गांवों के जीवन स्तर में सुधार के लिए स्वच्छता व साफ पेयजल आपूर्ति सबसे बड़ी चुनौती है। आम बजट में इससे निपटने के प्रस्ताव किये गये हैं। खुले में शौच मुक्त को व्यापक समर्थन मिला है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता का दायरा 42 फीसद से बढ़कर 60 फीसद हो गया है। इसे अब और बढ़ाने पर जोर दिया गया है। वित्त मंत्री जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा कि अगले चार सालों में आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रभावित 28 हजार गांवों को सुरक्षित पेयजल आपूर्ति का प्रस्ताव किया है। यह कार्य राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत कराया जायेगा।
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गांवों में युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए कौशल विकास पर खास जोर दिया गया है। आगामी वित्त वर्ष 2017-18 के आम बजट में 20 हजार युवाओं को तत्काल प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि आगामी 2022 तक प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा। मानव संसाधन सुधार के जरिये पंचायती राज संस्थाओं के कार्यक्रमों को लागू किया जायेगा।
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सरकार ने किसानों व ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के जीवन और पर्यावरण में सुधार लाने के लिए आम बजट में पर्याप्त समर्थन दिया है। ग्रामीण व कृषि संबद्ध क्षेत्रों के लिए आम बजट में 24 फीसद अधिक आवंटित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास और आजीविका के अवसरों को प्रोत्साहित करने के लिए दीन दयाल अंत्योदय योजना और ग्रामीण आजीविका मिशन के बाबत 4500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और क्रेडिट सहायता योजनाओं का आवंटन तीन गुना से अधिक बढ़ा दिया गया है।
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वर्ष 2019 तक एक करोड़ मकान बनाने का प्रस्ताव है। ग्रामीण आवास योजना का बजट आवंटन 1500 करोड़ से बढ़ाकर 2300 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पीएमजीएसवाई की सड़कें बचे खुचे हर गांव को पक्की सड़कों से जोड़ देंगी। इसका आवंटन 19 हजार करोड़ से बढ़ाकर 27 हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है। ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए मनरेगा जैसी योजना को भरपूर समर्थन मिला है।





