ग्रीन कार्ड पाने के लिए भारत के 3 लोग हर हफ्ते खर्च कर रहे हैं 5 लाख डॉलर

अमेरिका में रहने के लिए हर हफ्ते औसतन 3 भारतीय 5 लाख डॉलर तक की रकम खर्च कर रहे हैं नई दिल्ली। अपने सपने को जीने और अमेरिका में रहने के लिए हर हफ्ते औसतन 3 भारतीय 5 लाख डॉलर तक की रकम खर्च कर रहे हैं।ग्रीन कार्ड पाने के लिए भारत के 3 लोग हर हफ्ते खर्च कर रहे हैं 5 लाख डॉलरइकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक भारतीयों की ओर से ईबी-5 इन्वेस्टर वीजा प्रोग्राम के तहत ग्रीन कार्ड पाने के लिए इतनी भारी भरकम रकम खर्च की जा रही है। आपको बता दें कि यह वीजा ऐसे विदेशी निवेशकों के लिए जारी किए जाते हैं जो नए उद्यम शुरु कर कम से कम 10 लोगों के लिए रोजगार का सृजन का वादा करते हैं।

यह विदेशी नागरिकों और उनके परिवार को ग्रीन कार्ड और स्थायी रेजिडेंसी मुहैया कराता है। ग्रीन कार्ड और स्थायी रेजिडेंसी पाने के लिए दो तरीके हैं। पहला, 10 लाख डॉलर के निवेश के साथ नया बिजनेस शुरु कर कम से कम 10 लोगों के लिए रोजगार का सृजन किया जाए।

वहीं, दूसरा तरीका सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त ईबी-5 बिजनेस में 5 लाख डॉलर यानी 3.4 करोड़ रुपये के निवेश के साथ ग्रामीण क्षेत्र में 10 या उससे ज्यादा लोगों को फुल टाइम जॉब देना सुनिश्चित करना।

एलसीआर कैपिटल पार्टनर्स इन्वेस्ट एंड इमिग्रेशन कंसल्टेंसी है। यह निवेशकों के फंड्स डंकिन डोनट्स और फोर सीजन्स में निवेश करता है। कंपनी के सह-संस्थापक रोहेलियो कासरेस ने कहा, “हमने कम समय में 210 निवेशकों को जोड़ा और इसमें 42 भारतीय शामिल हैं। ईबी-5 प्रोग्राम के लिए बियान, रिलायंस, आदित्य बिड़ला और मैककिन्सी के शीर्ष कार्यकारी ने भी अपनी दिलचस्पी दिखाई है।

वे नहीं चाहते कि उनके बच्चे अमेरिका में नौकरी के लिए अनिश्चतताओं का सामना करें।”रोहेलियो कासरेस की मानना है कि वर्तमान में ईबी-5 के लिए हड़बड़ी का माहौल दो कारणों से है, पहला ट्रंप प्रशासन की ओर से एच-1बी पर नई नीति को लाने के संकेत देने और अप्रैल महीने में ईबी-5 वीजा का समाप्त होना है।

बीते हफ्ते यूनाइटेड स्टेट्स सिटिजनशिप ऐंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) ने ईबी-5 निवेशकों के वीजा प्रोग्राम में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसमें निवेश की रकम पांच लाख डॉलर से 13.5 लाख डॉलर बढ़ाया जाना भी शामिल है।

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