गोण्‍डा : धान को रोगों और कीटों से कैसे रखें सुरक्षित? प्रबंधन के लिए दिए गए कई अहम सुझाव

मनकापुर, गोण्डा। कृषि विज्ञान केन्द्र मनकापुर गोण्डा के शस्य वैज्ञानिक डॉ० राम लखन सिंह ने बताया कि धान की फसल में कीट व रोगों का प्रबंधन अतिआवश्यक है। धान की फसल में दीमक जड़ की सूंडी, नरई कीट, पत्ती लपेटक, कीट तना, बेधक हिस्पा, बंका कीट, हरा फुदका, भूरा फुदका, सफेद पीठ वाला फुदका, सैनिक कीट, गंधी बग, आदि कीटो तथा खैरा, सफेद रोग, शीथब्लाइट, भूरा धब्बा, झोंका रोग, जीवाणु झुलसा, धारी झुलसा, मिथ्या कड़ुवा आदि रोगों का प्रकोप होता है। कीटो एवं रोगों के प्रकोप से फसल की काफी नुकसान होती है।

कीट व रोग का समय से प्रबंधन आवश्यक है।दीमक व जड़ की सूड़ी के नियंत्रण हेतु क्लोरपारिफॉस 20ई सी की 1 लीटर मात्रा को 300ली० पानी में घोल बनाकर प्रत्येकड़ कर की दर से छिड़काव करना चाहिए। हरा फुदका व सफेद पीठ वाला फुदका की रोकथाम हेतु इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की आधा मिली लीटर मात्रा को प्रति लीटर में पानी में घोलकर छिड़काव करें। तनावेदक पत्ती लपेटक बका कीट व हिस्पा  कीट के नियंत्रण हेतु कारटॉप हाइड्रोक्लोराइड 4जी 7 किलो ग्राम प्रति एकड़ की दर से स्थिर पानी में प्रयोग करें। गंधीबंग एवं सैनिक कीट के नियंत्रण हेतु मिथाइल पैराथियांन 2% परसेंट धूल की 8 किलो मात्रा प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ० एम के पांडे ने खैरा रोग के नियंत्रण हेतु जिंक सल्फेट 21% की 10 किलो ग्राम मात्रा प्रति एकड़ की दर से प्रयोग की संतृप्ति की इस रोग में पत्तियां पीली पड़ जाती है। जिस पर बाद में कत्थई रंग के धब्बे बन जाते हैं सीथ ब्लाइट में पत्र कचुल पर अनियमित आकार के धब्बे बन जाते हैं जिनका मध्य भाग हल्का तथा किनारे गहरे भूरे हो जाते हैं। जीवाणु झुलसा रोग में पत्तीय नोक या किनारे से सूखने लगते हैं। सूखे हुए किनारे अनियमित एवं टेढ़े मेढ़े हो जाते हैं।भूरा धब्बा रोग में पत्तियों पर गहरे कत्थई रंग के गोल या अंडाकार धब्बे बन जाते हैं।इन धब्बों के चारों तरफ पीला घेरा बन जाता है।मध्य भाग पीलापन लिए हुए कत्थई रंग का होता है।

झोंका रोग : इस रोग में पत्तियों पर आंख की आकृति के धब्बे बनते हैं जो मध्य में राख के रंग तथा किनारे गहरे कत्थई रंग के होते हैं पत्तियों के अलावा बालियां डंठल पुष्प शाखाओं एवं गाँठो पर काले भूरे धब्बे बनते हैं।

जीवाणु धारी झुलसा : इस रोग में पत्तियों पर नसों के बीच कत्थई रंग की लंबी-लंबी धारिया बन जाती है।

मिथ्या कडुवा : इस रोग में बालियां के कुछ दाने पीले रंग के पाउडर में बदल जाते हैं जो बाद में काले हो जाते हैं।

उपचार : शीथ ब्लाइट झोंका रोग की रोकथाम हेतु कार्बोडॉजिम 50% डब्ल्यु पी की दो सौ ग्राम मात्र या हेक्साकोना

जोल 5% के 400 मिलीलीटर मात्रक को प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। भूरा धब्बा रोग की रोकथाम हेतु मैंकोजेब या जिनेब 75 % डब्ल्यु पी की 800 ग्राम मात्रा को प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। जीवाणु झूलता, जीवाणु धारी झुलसा रोग की रोकथाम हेतु पस्ट्रेप्टोसाईक्लीन 6 ग्राम 200 ग्राम कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 50% को प्रति एकड़ 300 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। मिथ्या कड़ुवा रोग की रोकथाम हेतु कार्बोडॉजिम 50% डब्ल्यु पी की 200 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

विद्युत उपकेन्द्र का ब्रेकर जलने से उपभोक्ता परेशान

मनकापुर, गोण्डा। उप केन्द्र विद्युत ग्रामीण का ब्रेकर जल जाने से सैकडों विद्युत उपभोक्ता भीषण गर्मी से परेशान हो रहे। लखनऊ की टीम पहुंच कर मरम्मत करने में जुटी हुई है।

तहसील मुख्यालय के मोहल्ला गायत्री नगर में स्थित 33/11केवी विद्युत उप केन्द्र ग्रामीण की बीते आधी रात को 11केवी ब्रेकर जल जाने से रेहरा, नवोदय ग्रामीण, मोतीगंज, विद्या नगर व मसकनवा फीडर की विद्युत 15 घंटे बाधित होने से सैकडो विद्युत उपभोक्ता इस भीषण गर्मी में हलकान हो रहे है। सबसे ज्यादा समस्या छोटे बच्चे व बुर्जग जन परेशान हो रहे है। ब्रेकर जल जाने पर अधिशाषी अभियंता द्वारा लखनऊ टीम विद्युत केन्द्र पर पहुंच कर जले ब्रेकर को ठीक करने में जुटी हुई है।

विद्युत बाधित होने से लोग बूद-2 पानी के लिये परेशान रहे और लोगो के इंनवर्टर भी बैठ गयी। वही शहरी क्षेत्र में भी विद्युत आंख मिचौली करती रही जिससे कस्बें के लोग परेशान हुए।समाचार प्रेषण तक शहरी क्षेत्र व ग्रामीण के पांच फीडर पर विद्युत बहाल नही हो सकी है। वही अधिशाषी अभियंता वितरण चतुर्थ वाईके चतुर्वेदी ने बताया कि शीघ्र ही बहाल होगी।

सोशल डिस्टेन्सिंग के साथ मनाया जाएगा स्वाधीनता दिवस, जिलाधिकारी ने दिए निर्देश

गोण्डा : स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजन की तैयारियों को लेकर गुरूवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित हुई, जिसमें स्वतंत्रता दिवस समोराह के आयोजन की रूपरेखा तय की गई।

बैठक में जिलाधिकारी डाॅ. नितिन बंसल ने कहा कि कोरोना वैश्विक महामारी के कारण इस बार स्वतंत्रता दिवस का आयोजन सोशल डिस्टेन्सिंग का अनुपालन सुनिश्चित कराते हुए किया जाएगा। सभी जगहों पर सुबह 09 बजे ध्वजारोहण होेगा। भीड़-भाड़ वाले कार्यक्रम नहीं आयोजित होगें तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम, भाषण, वाद-विवाद प्रतियोगिता, कवि सम्मेलन आदि का आयोजन डिजिटल प्लेटफार्म पर ही होगा। मंच लगाकर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे।

बैठक में जिलाधिकारी ने डीपीआरओ तथा नगर निकायों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वेे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थापित महापुरूषों की प्रतिमाओं व प्रमुख स्थलों की साफ-सफाई करा दें। जिलाधिकारी ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रसारण वे सोशल मीडिया या अन्य किसी भी डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से कराएं जिससे भीड़ एकत्रित न हों और सोशल डिस्टेन्सिंग के साथ कार्यक्रम आयोजित हो सकें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी सरकारी/गैर सरकारी संस्थानों में प्रातः 009 बजे ध्वजारोहण अनिवार्य रूप से होगा।

बैठक में सीडीओ शशांक त्रिपाठी, सीएमओ डा0 मधु गैरोला, एडीएम राकेश सिंह, एएसपी महेन्द्र कुमार, एसडीएम कुलदीप सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक अनूप श्रीवास्तव, बीएसए इन्द्रजीत प्रजापति, डीपीआरओ सभाजीत पाण्डेय, डीसी मनरेगा हरिश्चन्द्र प्रजापति, जेल अधीक्षक शशिकान्त सिंह यादव, एआरटीओ प्रशासन संजीव सिंह, श्रम प्रवर्तन अधिकारी योगेश दीक्षित, पूर्व चेयमरैमन कमरूद्दीन, नाजिर सुनील कुमार सहित अन्य विभागीय अधिकारी व सम्भ्रान्तजन उपस्थित रहे।

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