खुशहाल जीवन के लिए हर मर्द को भगवान श्री कृष्ण के लिए करनी चाहिए बस ये एक चीज…

खुशहाल जीवन

खुशहाल जीवन के लिए भगवान श्रीकृष्ण का जीवन बेहद ही रासलीलाओं से भरा हुआ था। और हम सभी ने टीवी पर्दे और भगवत गीता में इसके बारे में पढ़ा और सुना है। श्री कृष्ण ने अपने जीवन में सभी रिश्तों को बड़ी ईमानदारी से निभाया है। आइए जानते हैं ऐसी पांच बातें जिसे जीवन को खुशहाल बनाने के लिए हर मर्द को भगवान श्री कृष्ण से जरूर सीखना चाहिए। खुशहाल जीवन

गोकुल में कन्हैया का जीवन संघर्षों से भरा रहा। उनके मामा कंस ने उन्हें मारने के लिए लगातार कई षड्यंत्र किए।लेकिन कृष्ण कभी इन बाधाओं से विचलित नहीं हुए।ऐसे ही हर व्यक्ति को जीवन में आने वाली कठिनाईयों का सामना बिना हिम्मत हारे करते रहना चाहिए।फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य करते रहना चाहिए। अंत में जीत आपकी ही होगी।
वृंदावन में राधा के साथ कई ऐसी गोपियां थीं जो श्री कृष्ण से बेहद प्यार करती थीं। भगवान कृष्ण उन सभी गोपियों का सम्मान करते थे लेकिन राधा के प्रति उनका प्यार उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। आज के प्रेमियों को श्री कृष्ण के प्यार और प्रेमिकाओं के प्रति सम्मान से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। 

भगवान विष्णु का अवतार होने के बावजूद कृष्ण भगवान के मन में अपने गुरुओं के लिए हमेशा बहुत सम्मान रहा। अवतार रूप में वह जिस भी संत से मिले उन्होंने उन्हें पूरा सम्मान दिया।

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भले ही श्री कृष्ण देवकी और वासुदेव के पुत्र कहलाते हैं, लेकिन उनका पालन-पोषण यशोदा और नंद ने किया था। बावजूद इसके भगवान कृष्ण ने अपनी दोनों मांओं देवकी- यशोदा को अपने जीवन में बराबर का स्थान दिया।दोनों के प्रति अपने कर्तव्यों को बखूबी निभाया।अपने इस स्वभाव से कृष्ण ने दुनिया को सिखाया कि हमारे जीवन में मां-बाप का स्थान सबसे ऊंचा होना चाहिए। हर व्यक्ति को अपना जीवन अपने माता-पिता की सेवा में समर्पित कर देना चाहिए। 
भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की दोस्ती के किस्से हर बच्चा बचपन से सुनता आया है।उनकी दोस्ती को देखकर हर व्यक्ति को अपने रिश्ते की कद्र करना और दोस्तों के लिए कुछ भी कर गुजरने का जजबा देखने को मिलता है। इसके अलावा भगवान कृष्ण ने अपने हर रिश्ते को ऊंच-नीच, अमीरी-गरीबी, छोटे-बड़े की पाबंदियों से हमेशा दूर रखा है। 
कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का उपदेश देते हुए कृष्ण उन्हें यही समझाते हैं कि सामने जो लोग खड़े हैं वो आपके शत्रु हैं, दादा, चाचा और भाई नहीं हैं।उनके इस संदेश से यह शिक्षा मिलती है कि सत्य की राह पर चलते हुए हमें किसी का पक्ष नहीं लेना चाहिए। जो व्यक्ति गलत है उसे गलत और सही को सही ही कहना चाहिए।हर  मर्द अगर ये गुण सीख लें तो आए दिन घरों में सास-बहू के बीच होने वाले झगड़े अपने आप ही खत्म हो जाएंगे। 
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