क्या कुंवारी लड़कियां भी कर सकती हैं वट सावित्री व्रत?

हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना के लिए कई तरह के व्रत करती हैं, इन्हीं में से एक व्रत वट सावित्री का है, जो इस साल 16 मई 2026 शनिवार के दिन है।
वट सावित्री व्रत केवल शादीशुदा महिलाएं ही रख सकती हैं या कुंवारी लड़की भी, आइए जानते हैं इसको लेकर धार्मिक शास्त्र क्या कहते हैं?
कुंवारी कन्याएं इस व्रत को कर सकती हैं?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, कुंवारी लड़कियां भी वट सावित्री का व्रत रख सकती है, लेकिन इसका उद्देश्य और पूजा की परंपरा शादीशुदा महिलाओं से थोड़ी अलग होती है। अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों में वट सावित्री व्रत को खासतौर पर सुहागिन महिलाओं के लिए बताया गया है, जो अपने पति की लंबी आयु और खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए इसे करती हैं।
वहीं ज्योतिषाचार्य की व्याख्याओं के मुताबिक, अविवाहित लड़की भी इस व्रत को अच्छे जीवनसाथी, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की इच्छा से रख सकती हैं। खासतौर पर उत्तर भारत के बिहार-उत्तर प्रदेश के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में कुंवारी लड़कियां भी इस व्रत को रखती हैं।
कुंवारी लड़कियां ऐसे करें पूजा?
हालांकि यहां इस बात का ध्यान देना बेहद जरूरी है कि, शास्त्रों में अनिवार्य रूप से कुंवारी लड़कियों को यह व्रत करना ही चाहिए, ऐसा कहीं भी नहीं लिखा है। कहने का मतलब यह कोई बाध्य नियम नहीं है, बल्कि आस्था और अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं पर आधारित है। इसलिए इसे शास्त्र आदेश बताना पूरी तरह से गलत अवधारणा होगा।
कुंवारी लड़कियां इस व्रत को करती हैं, तो उन्हें पति की लंबी उम्र की बजाय योग्य जीवनसाथी, बेहतर संबंध और भविष्य में खुशहाल दांपत्य की कामना से करनी चाहिए। इस दौरान पूजा विधि सामान्य रूप से वही रहनी चाहिए, जो आप रोजाना करती हैं। वट वृक्ष की पूजा के साथ सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें।
वट सावित्री व्रत को लेकर धार्मिक स्रोत क्या कहते हैं?
इस व्रत का स्पष्ट उल्लेख खासतौर पर स्कंद पुराण, भविष्योत्तर पुराण और लोककथाओं में देखने को मिलता है।
इन धार्मिक ग्रंथों में व्रत का केंद्र बिंदु पातिव्रत्य और पति कल्याण के लिए है, इसलिए शादीशुदा महिलाओं से इसका संबंध सीधे तौर पर जोड़ा जाता है।
वहीं, कुंवारी कन्याओं द्वारा व्रत रखने की परंपरा ज्यादातर लोकविश्वास और क्षेत्रीय मान्यताओं पर आधारित है।





