क्या आप भी हैं हकलाने से परेशान? तो घबराएं नहीं ऐसे करें लोगों का सामना

1_1441189695लाइफस्टाइल डेस्कः श्रीमती शर्मा जब अपने 10 साल के बच्चे के मुंह से सुनती हैं – “म..म…मम्म…मी..मम्मी हम म..अ..मैच जीत गए हैं।” आप जानते हैं, उनकी क्या हालत होती है? वो बेहद परेशान हो जाती हैं।

अमित बोलते वक्त जब हकलाता है तो निराशा से भर जाता है। अपने छोटे भाई को ठीक से बोलते देख वो अपने आपको असहाय महसूस करता है। हकलाने की वजह से अमित के क्लासमेट उसे बहुत चिढ़ाते हैं। पिछले साल तो वो अक्सर स्कूल से घर रोते-रोते आता था। आपको सुन कर हैरानी होगी, गाना गाते वक्त अमित बिल्कुल भी नहीं हकलाता, न ही किसी घटना का बखान करते वक्त उसके शब्द अटकते हैं।

लेकिन जब टीचर क्लास में अमित से जोर से पढ़ने के लिए कहते हैं तो वह परेशान हो जाता है। उसके शब्द अटकने लग जाते हैं, वो हकलाना शुरू कर देता है। इसके अलावा, जब कभी अमित को गुस्सा आता है तो वो हकलाने लग जाता है। अपने दोस्तों से फोन पर बातचीत करना भी अमित को परेशानी में डाल देता है, क्योंकि वो हकलाने लगता है। अमित और श्रीमती शर्मा के बेटे की तरह ही हजारों बच्चे स्पीच प्रॉब्लम की समस्या से परेशान हैं। अनेकों माएं अपने बच्चों के हकलाने की आदत से चिंतित हैं। लेकिन सिर्फ चिंता करने से ही ये समस्या दूर नहीं हो सकता। इस डिसऑर्डर से निपटने के लिए पहले लोगों को इसे समझने की जरूरत है।

क्या है हकलाना

हकलाने की समस्या मुख्य रूप से पुरुषों में पाई जाती है। 80 प्रतिशत पुरुष हकलाने की समस्या से परेशान रहते हैं। मुख्य रूप से ये नवजात शिशु को प्रभावित करती है। सामान्य रूप से हकलाने की समस्या उन 65 फीसदी लोगों में आनुवंशिक रूप से पाई जाती है।

आमतौर पर हकलाने की समस्या की शुरुआत तब से होती है, जब आपका बेबी पांच साल से कम उम्र का हो। 10 से 18 साल तक की उम्र तक ये समस्या काफी बढ़ जाती है उसके बाद जैसे-जैसे व्यक्ति बड़ा होता है, हकलाने की ये समस्या या तो कम या दूर हो जाती है।

 

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