कोरोना काल में वित्‍तमंत्री द्वारा पेश किये गये इस अहम बजट में खेती-किसानी पर दिखाई मेहरबानी

पौराणिक भारतीय ग्रंथों में मनुष्य के षडरिपु यानी छह शत्रुओं काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह व द्वेष का वर्णन है। इसी प्रकार वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट से पहले छह कठिन समस्याओं का सामना किया और उन पर विजय पाने के लिए बजट में उपाय भी प्रस्तुत किए। अगर मुझे वर्ष 2020 की छह बाधाओं की सूची बनानी हो तो निश्चित तौर पर कोविड-19 की महामारी सबसे ऊपर होगी। महामारी के दौरान राजकोषीय व्यय ज्यादा हुआ और वित्तीय स्नोतों में संकुचन पैदा होता गया।

ज्यादातर आर्थिक गतिविधियां जैसे यातायात, रेलवे, बस, थिएटर, व्यापारिक प्रतिष्ठान, बाजार व असंगठित क्षेत्र की गतिविधियां ठहर गईं। दूसरी सबसे बड़ी समस्या विकास दर को फिर से हासिल करना है। तीसरा, सभी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं पूरी तरह रुक गई हैं और इसके कारण बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ी है। यह चौथी बड़ी समस्या से भी संबंधित है, जिसे बेरोजगारी और व्यावसायिक शहरों के प्रवासी कामगारों की समस्या के साथ जोड़कर देखा जा सकता है। 

पांचवीं सबसे बड़ी समस्या मुद्रा स्फीति है और इसे नियंत्रण में रखना सबसे बड़ी चुनौती। छठी समस्या औद्योगिक उत्पादन और खासकर सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों यानी एमएसएमई से संबंधित है। कामकाज ठप होने से बड़ी संख्या में दैनिक कामगार सड़कों पर आ गए और इसके कारण घर लौटने वाले प्रवासी कामगारों की संख्या में इजाफा हुआ। सौभाग्यवश कृषि और ग्रामीण क्षेत्र इस महामारी से अछूता रहा, लेकिन आर्थिक समस्या से अप्रभावित नहीं रह पाया। वित्तमंत्री ने इन समस्याओं का सामना करते हुए कठिन परिस्थितियों में बजट पेश किया।

उन्होंने कृषि क्षेत्र के सभी पहलुओं पर मजबूती से बात रखी, जिन्हें समस्याओं के तौर पर रखा जाता रहा है। शुरुआत में उन्होंने सदन को बताया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए ने कृषि उत्पादों की खरीद पर बड़ी राशि खर्च की है। वर्ष 2013-14 में गेहूं की खरीद पर जहां सिर्फ 33.8 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए, वहीं वर्ष 2020-21 में 75.06 हजार करोड़ रुपये गेहूं खरीद में लगाए गए, जिसका लाभ 43.36 लाख किसानों को मिल चुका है। इसी प्रकार एनडीए सरकार धान खरीद पर 172.7 हजार करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है।

उन्होंने साफ किया कि सरकार ने न सिर्फ गेहूं व धान बल्कि दलहन व अन्य अनाजों के साथ-साथ कपास की खरीद के लिए बड़ी राशि का आवंटन किया है। उन्होंने स्वामित्व योजना की प्रगति का ब्योरा भी सदन के समक्ष रखा और बताया कि 1,241 गांवों के 1.8 लाख किसानों को इसका लाभ मिल चुका है। देश के दूसरे गांवों में भी इसे तेजी के साथ लागू किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2021-22 में 16.5 लाख करोड़ रुपये बतौर कृषि ऋण वितरित किए जाएंगे। ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास के लिए फंड को 30 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40 हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है। नाबार्ड सूक्ष्म सिंचाई परियोजना में पांच हजार करोड़ रुपये की मदद कर रहा है।

ई-नाम भी उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है तथा इसके साथ 100 और बाजारों को जोड़ने का प्रस्ताव है। उन्होंने बजट भाषण में वादा किया कि कृषि उत्पाद विपणन समितियों (एपीएमसी) के विकास के लिए कृषि बुनियादी ढांचा फंड उपलब्ध कराया जाएगा। मत्स्य उद्योग के संरक्षण के साथ-साथ प्रवासी कामगारों और श्रमिकों के पुनर्वास की भी घोषणा की। वर्तमान में जारी किसान स्वाभिमान, स्वच्छ भारत, आयुष्मान भारत, ग्रामीण बुनियादी ढांचा व प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के अतिरिक्त बजट में कई अन्य प्रावधान किए गए हैं। आत्मनिर्भर भारत की तरफ बढ़ाया गया यह कदम न सिर्फ कृषि क्षेत्र को मजबूती देगा, बल्कि उसे विकास की ओर भी ले जाएगा।

वित्तमंत्री ने इस बार बजट के सभी छह महत्वपूर्ण घटकों को षडभुज करार दिया। इन छह स्तंभों वाली रूपरेखा में समग्र विकास व आकांक्षी भारत तीसरे नंबर पर हैं। कृषि क्षेत्र को उन्होंने इसी घटक में रखा और बताया कि हमारी सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

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