कैसे करें सत्य व ब्रह्म का ज्ञान

सत्‍या अन्‍वेशी सत्‍यकाम

सत्यकाम ब्रह्म के सत्य के बारे में जानना चाहते थे। इसलिए मां जाबाल की आज्ञा लेकर वे गौतम ऋषि के आश्रम चले गए। ऋषि ने आश्रम की चार सौ दुर्बल गायों को सत्यकाम को सौंपते हुए कहा, ‘वत्स! इन गायों को लेकर पास के वन में चले जाओ। स्वस्थ होने के साथ-साथ जब इनकी संख्या भी बढ़ जाए, तब मेरे पास आ जाना। उसी समय मैं तुम्हें ब्रह्म के विषय में बताऊंगा। सत्यकाम उन गायों को लेकर तुरंत वन चले गए।कैसे करें सत्य व ब्रह्म का ज्ञान

दिन-रात गायों की सुरक्षा और उनकी देखभाल में खुद को भुला दिया। यह कार्य उनकी साधना बन गई। जंगल की खुली हवा, ताजा घास और नदियों का स्वच्छ पानी मिलने के कारण समय के साथ गायें पूरी तरह स्वस्थ हो गई। उनकी संख्या भी अधिक हो गई। गायों के निंरतर ध्यान, शुद्ध एवं शांत वातावरण, गौदुग्ध एवं फलों के आहार ने सत्यकाम को भी पूरी तरह एकाग्र और अतंर्मुखी बना दिया। उनकी सेवा रूपी तपस्या से ईश्वर उन पर प्रसन्न हुए और उन्हें ब्रह्म का ज्ञान हो गया। जब वे गायों को लेकर आश्रम पहुंचे, तो उनकी उपलब्धियां देखकर आचार्य अत्यंत प्रसन्न हुए।

संसार में सब संभव है

गुरू को प्रसन्‍न देख कर सत्यकाम ने उनसे ब्रह्मज्ञान का उपदेश देने का आग्रह किया। इसके जवाब में आचार्य ने कहा कि तुम्हें सत्य का ज्ञान हो गया है, अब और किसी उपदेश की जरूरत नहीं है। इतना सुनते ही सत्यकाम ने उनसे कहा कि इससे वह संतुष्ट नहीं हैं और वह अपने गुरु के मुख से सत्य और ब्रह्म के बारे में जानना चाहते हैं। इस तरह उन्होंने आचार्य से संपूर्ण ज्ञान प्राप्त किया। सत्यकाम पूर्ण ज्ञानी होकर वापस अपनी मां के पास आ गए एवं शांति के साथ अपने धर्म का पालन करने लगे। इस कथा का यही वास्‍तविक सार है कि धैर्य व दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव लगने वाले कार्य भी संभव हो जाते हैं। 

Ujjawal Prabhat Android App Download Link
News-Portal-Designing-Service-in-Lucknow-Allahabad-Kanpur-Ayodhya

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button