केंद्र सरकार किसानों से 30 दिसंबर को करेगीं बातचीत, एक दिन आगे बढ़ाई तारीख

केंद्र सरकार की किसानों के साथ बातचीत 30 दिसंबर को दिन में दोपहर 2:00 बजे होगी. इस बाबत केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने किसानों को एक चिट्ठी लिखी है.

किसानों की बैठक से पहले गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की एक बहुत ही महत्वपूर्ण बैठक हो रही है. बता दें कि किसानों ने सरकार को कल यानी 29 दिसंबर को 11 बजे 4 प्रस्तावों के आधार पर मिलने का प्रपोजल भेजा है.

किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि मंगलवार को होने वाली चर्चा हमारे एजेंडे पर होगी. हम सरकारी प्रस्ताव को ठुकरा चुके हैं, अब चर्चा कानून वापस लेने और स्वामीनाथन रिपोर्ट पर होनी चाहिए. अभी हमारे आंदोलन को 33 दिन हुए हैं, सरकार नहीं मानी तो 66 दिन भी हो जाएंगे.

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कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने किसानों के मसले पर फिर मोदी सरकार को घेरा है. प्रियंका ने कहा कि यह कहना कि यह राजनीतिक साजिश है एकदम गलत है, जिस तरह के शब्द इस्तेमाल किए जा रहे हैं. मैंने आपको पहले भी कहा था सरकार जिस तरह के शब्द इस्तेमाल कर रही है यह पाप है. सरकार को किसानों की बात सुननी चाहिए और यह काला कानून वापस लेना चाहिए.

बीजेपी के डीके अरुणा की ओर से ट्वीट किया गया है कि हर कोई राहुल गांधी की विदेश यात्रा को बचाने में लगा है. विपक्ष कब अपनी जिम्मेदारी निभाएगा? किसान भाई, इस तरह के टूरिस्ट राजनेता से गुमराह नहीं होंगे. कांग्रेस की ओर से बीजेपी को जवाब दिया गया है कि बीजेपी राहुल की निजी यात्रा का इस्तेमाल अपनी राजनीति के लिए कर रही है.

किसानों के समर्थन में कांग्रेस का प्रदर्शन जारी है. सोमवार को कांग्रेस अपने स्थापना दिवस के मौके पर भोपाल में किसानों के समर्थन में ट्रैक्टर रैली निकालेगी. इसमें एमपी कांग्रेस के नेता, विधायक और अन्य लोग मौजूद रहेंगे. बता दें कि बीते दिन बीजेपी की ओर से राहुल गांधी का एक वीडियो डाल किसानों के मसले पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया गया.

अबतक सरकार और किसानों के बीच 6 राउंड की चर्चा हो चुकी है, लेकिन कोई निर्णय नहीं निकला. अब एक बार फिर दोनों पक्ष बातचीत की टेबल पर आए हैं, ऐसे में उम्मीदें बरकरार हैं. दूसरी ओर किसानों ने आंदोलन तेज़ किया है, नए साल तक देश के अलग-अलग हिस्सों में किसान संगठन सभाएं करेंगे.

कड़ाके की ठंड में भी किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं और आंदोलन को एक महीने से ऊपर का वक्त हो गया है. ऐसे में हर किसी को आने वाली चर्चा से कई उम्मीदें हैं. किसानों ने हरियाणा के सभी टोलों को मुक्त कराया हुआ है और मांगें पूरी होने तक यही स्थिति रखने की बात कह रहे हैं.

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