यदि उस दिन काला पहाड़ को जाति से न निकाला जाता तो आज बंगाल हिंदू बहुल होता

लाइव इंडिया डेस्क। भारतीय इतिहास की भंयकर भूलों की अगर आप सूची बनाने बैठ जाएं, तो शायद बनाते बनाते आपका यह जीवन छोटा पड़ जाएगा।

यदि उस दिन काला पहाड़ को जाति से न निकाला जाता तो आज बंगाल हिंदू बहुल होता

कौन है काला पहाड़

इन्हीं भूलों का परिणाम है कि विलक्षण प्रतिभाएं और क्षमताएं होने के बावजूद हम आज भी समस्याओं से ही जूझ रहे हैं।
ऐसी ही एक बहुत बड़ी समस्या है हिंदू-मुस्लिम की। धर्म के नाम पर देश बंटने के बावजूद स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है।
क्या आपको पता है ऐसी ही एक ऐतिहासिक भूल के चलते पूर्वी पाकिस्तान जो आज बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है एक अलग देश बन गया। आजादी से पहले बांग्लादेश पश्चिम बंगाल का ही हिस्सा हुआ करता था।
बंगाल में एक ऐसी ही भूल का नाम काला पहाड़ है। बंगाल के इतिहास में काला पहाड़ एक अत्याचारी शासक के रूप में जाना जाता है।
क्या आपको मालूम है कि काला पहाड़ का असली नाम कालाचंद राय था और वह एक बंगाली ब्राहम्ण युवक था।
पूर्वी बंगाल के उस वक्त के मुस्लिम शासक की बेटी को कालाचंद राय से प्यार हो गया। दरअसल, कालाचंद राय बांसुरी बहुत अच्छी बजाता था। बादशाह की बेटी को उसकी बांसुरी की धुन बहुत पंसद थी। धीरे धीरे उसको कालाचंद राय से प्रेम हो गया और शहजादी ने उससे शादी की इच्छा जाहिर की। वह उससे इस कदर प्रेम करती थी कि इस्लाम छोड़कर हिंदू विधि से शादी करने को तैयार हो गई।
लेकिन हमेशा की तरह उस वक्त भी हिन्दू धर्म के ठेकेदार अड़ गए। उनको जब पता चला कि कालाचंद राय एक मुस्लिम राजकुमारी से शादी कर उसे हिंदू बनाना चाहता है, तो उन्होंने कालाचंद का विरोध करते हुए उसे धर्म और जाति से बेदखल करने की चेतावनी दे दी।
लेकिन कालाचंद राय ने धर्म के ठेकेदारों के सामने से झुकने से मना कर दिया और राजकुमारी से शादी करने को तैयार हो गया। इस पर उस मुस्लिम युवती के हिंदू धर्म में आने का हिंदू धर्म के ठेकेदारों ने न केवल विरोध किया, बल्कि धर्म व जाति बहिष्कृत कर कालाचंद राय और उसके परिवार को भी समाज से बेदखल कर अपानित भी किया।
अपने और परिवार के अपमान से बौखलाकर कालाचंद गुस्से से आग बबुला हो गया और उसने इस्लाम स्वीकारते हुए उस युवती से निकाह कर लिया। निकाह करते ही वह राज सिंहासन का उत्तराधिकारी हो गया।
उसके बाद धर्म के ठेकेदारों से अपने अपमान का बदला लेने के लिए कालाचंद राय ने तलवार के बल पर हिन्दुओं को मुसलमान बनाना शुरू कर दिया।
उसका एक ही नारा था मुसलमान बनो या मरो। पूरे पूर्वी बंगाल में उसने इतना कत्लेआम मचाया कि लोग तलवार के डर से मुस्लिम धर्म स्वीकार करते चले गए। बंगाल को इस अकेले व्यक्ति ने तलवार के बल पर इस्लाम में धर्मांतरित कर दिया। उसकी निर्दयता के कारण लोग उसे काला पहाड़ कहने लगे थे।
कालाचंद राय ने ऐसा केवल इस लिए किया था कि वह उन मूर्ख, जातिवादी, अहंकारी व हठधर्मी हिन्दू धर्म के ठेकेदारों को सबक सिखना चाहता था।
इतिहास इस प्रकार के एक नहीं कई उदाहरणों से भरा पड़ा है जब हिंदूओं ने अपनी संकीर्ण सोच से न जाने कितने कालाचंद राय का अपमान कर भारत को इस्लाम में परिवर्तित कर उसको इतिहास बदलने पर मजबूर कर दिया।
 

 

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