कानपुर में लॉकडाउन के पहले ही दिन बाजारों से लेकर गलियों तक पूरी तरह पसरा सन्नाटा

सप्ताह में तीन दिन के लॉकडाउन के पहले ही दिन बाजारों से लेकर गलियों तक पूरी तरह सन्नाटा रहा। सड़कों पर कहीं जरूरी काम से ही लोग निकलते आए, जिन्हें अपने परिवार में बीमार किसी की दवा लेनी थी या उन्हें अस्पताल में भर्ती करना था। लोग बेवजह सड़कों पर नजर ना आएं, इसके लिए प्रमुख चौराहों पर पुलिस भी तैनात थी। इसके अलावा कई जगह बैरीकेडिंग लगाकर चौराहों पर निकलने के रास्तों को छोटा कर दिया गया।

अप्रैल माह में तेजी से बढ़े कोरोना संक्रमण की वजह से तीन सप्ताह से सप्ताह के अंतिम दिनों में कर्फ्यू लगाया जा रहा है। इसमें पहली बार रविवार को कर्फ्यू लगाया गया था। दूसरे सप्ताह शनिवार और रविवार को कर्फ्यू लगाया गया और इस बार शनिवार, रविवार के साथ सोमवार को भी कर्फ्यू की घोषणा की गई है। तीन दिन के इस कर्फ्यू के पहले दिन सुबह सब्जी मंडियों में सन्नाटा रहा। सबसे ज्यादा भीड़ वाले रामादेवी और 13 ब्लाक सब्जी मंडी में कोई नजर नहीं आया।

मूलगंज चौराहा से घंटाघर चौराहे पर हर समय लगने वाला जाम भी नहीं था। सड़कें पूरी तरह खुली और चौड़ी नजर आ रही थीं। यहां दाहिनी ओर लोहा बाजार की दुकानों के शटर गिरे हुए थे वहीं बांयी और जनरलगंज की गलियों में जाने वाले रास्ते पर पैदल चलते कुछ लोग ही दिखे। घंटाघर चौराहा भी पूरी तरह सन्नाटे में था। ट्रेन से स्टेशन पर आए यात्री जरूर अपने घर जाने के लिए परेशान थे. उन्हें कोई वाहन नहीं मिल रहा था।

बड़ा चौराहा जो लोग भी वाहन से गुजर रहे थे पुलिस उन्हें रोक कर पूछताछ कर रही थी। उचित कारण होने पर ही उन्हें जाने दिया जा रहा था। बंदी की घोषणा करने के बाद भी खुली रहने वाली नयागंज की तमाम दुकानें, कपड़ा बाजार की दुकानों के शटर गिरे हुए नजर आए। सामान्य दिनों में लाटूश रोड में मुख्य शटर बंद कर पीछे की गलियों से सामान बेचने वाले भी आज पूरी तरह काम बंद किए हुए थे।

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