कांवड़ियों पर फूल बरसाने वाली यूपी पुलिस मुसलमानों को नमाज से रोकती है : असदुद्दीन ओवैसी

नोएडा के पार्कों में नमाज पढ़ने पर रोक लगाने के आदेश के बाद उठा विवादों का बवंडर थमने का नाम नहीं ले रहा। विपक्ष इस मुद्दे पर प्रदेश की योगी सरकार को आड़े हाथों ले रहा है। इसी कड़ी में अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट के जरिए हमला बोला है।
यूपी पुलिस को निशाने पर लेते हुए ओवैसी ने ट्विटर पर लिखा कि ‘यूपी पुलिस ने वास्तव में कांवड़ियों के लिए पंखुड़ियों की बौछार की, लेकिन सप्ताह में एक बार की जाने वाली नमाज शांति और सद्भाव को बाधित कर सकती है। यह मुसलमानों को बताया जा रहा है कि आप कुछ भी कर लो, गलती तो आपकी ही होगी।’

UP Cops literally showered petals for Kanwariyas, but namaz once a week can mean “disrupting peace & harmony”. This is telling Muslims: aap kuch bhi karlo, ghalti to aapki hi hogi.
Also, by law, how does one hold an MNC liable for what their employees do in individual capacity? https://t.co/b90Jw5ZMHY
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) December 25, 2018

आगे एआईएमआईएम सुप्रीमों ने लिखा कि ‘कानून के मुताबिक, कोई व्यक्ति कर्मचारी अगर व्यक्तिगत तौर पर कुछ करता है तो इसके लिए किसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कैसे उत्तरदायी ठहरा जा सकता है?’
बवाल बढ़ने पर नोएडा के डीएम बीएन सिंह ने कहा है कि एसएचओ पंकज राय का नोटिस सिर्फ नोएडा अथॉरिटी के सेक्टर-58 के पार्कों के लिए है, ना कि पूरे शहर के लिए। बता दें कि उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस ने सेक्टर 58 औद्योगिक क्षेत्र स्थित कंपनियों को चिठ्ठी लिखकर कर्मचारियों से खुले में नमाज पढ़ने से बचने की सलाह दी। अपने आदेश में पुलिस ने कहा  कि मुस्लिम कर्मचारी जुमे की नमाज पार्क जैसे खुले एरिया में न पढ़ने को कहा था।

नोएडा पुलिस ने कहा कि यह कदम 2019 के चुनावों को देखते हुए उठाया गया है। हमें उम्मीद है कि लोकसभा चुनावों से पहले साम्प्रदायिक सौहार्द बना रहेगा लोग  इसमें पुलिस प्रशासन की मदद करेंगे।  पुलिस ने पत्र में लिखा था कि, प्राय: यह देखने में आया है कि आपके कंपनी के मुस्लिम कर्मचारी पार्क में एकत्रित होकर नमाज पढने के लिए आते हैं, जिनको पार्क में सामूहिक रूप से मुझ एचएलओ द्वारा मना किया गया है एवं इनके द्वारा दिए गए नगर मजिस्ट्रेट महोदय के प्रार्थनापत्र पर किसी भी प्रकार की कोई अनुमति नहीं दी है।’

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