कठोर तपस्या व यज्ञ के बिना भगवान प्राप्ति नहीं- किंकर महाराज

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सुलतानपुर, 07 दिसम्बर (UjjawalPrabhat.Com)। सेमरी बाजार में 4 दिसम्बर से चल रहा नौ दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा महोत्सव के चौथे दिन की कथा में बोलते हुए अयोध्या से पधारे संत मानस किंकर महाराज ने श्रोताओं को राम जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर दुष्टों का अत्याचार बढ़ता है तब-तब भगवान अपने विभिन्न स्वरूपों में प्रकट होकर दुष्टों का संहार करके धर्म की स्थापना करते हैं। हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को कथा वाचक ने उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान का अवतार उसी के घर में होता है जो अपना जीवन वेद मार्ग पर चलाते हुए जनकल्याण हेतु तपस्या किया करते हैं, जिसमें महाराज स्वयंभू मनु और उनकी पत्नी सतरूपा ने नैमिष तीर्थ में कठोर साधना कर रहे थे। जिसके परिणामास्वरूप ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर ने प्रकट होकर दर्शन देते हुए वरदान मांगने को कहा, परन्तु मनु महाराज ने त्रिदेवों के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और कठिन तपस्या में पुनः लीन हो गये। भगवान को अन्त में आकाशवाणी द्वारा अपने अस्तित्व का परिचय कराते हुए श्रीराम रूप में दर्शन देकर वर मांगने को कहा, जिस पर मनु एवं सतरूपा ने भगवान के सामान ही पुत्र पाने की याचना की। जिस पर भगवान ने आशीर्वाद दिया कि जब तुम अयोध्या के राजा दशरथ के रूप में जन्म लोगे और पति पत्नी मिलकर यज्ञ करोगे तभी मैं स्वयं तुम्हारे पुत्र के रूप में प्रकट हो जाऊंगा। महाराज जी ने मनुष्य के जीवन में यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए नारद मोह का भी आनन्ददायक वर्णन किया। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में उपस्थित श्रोता आनन्दित हो गये। इस अवसर पर सेमरी प्रधान घनश्याम, बलवन्त सिंह, हेमन्त सिंह, मिश्रीलाल सेठ सहित कई लोग मौजूद रहे।
रिपोर्ट- अनिल निषाद
 

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