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ओलिंपिक पदक जीत सकते हैं भारतीय एथलीट : सेबेस्टियन

sebastian_05_10_2015नई दिल्ली। अगस्त में अंतराराष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ (आईएएएफ) के अध्यक्ष बने सेबेस्टियन को यह पद संभालने के बाद पहली बार भारत पहुंचे। अध्यक्ष बनने के बाद सेबेस्टियन का यह पहला विदेश दौरा है।

लंदन ओलिंपिक आयोजन समिति के चेयरमैन, विश्व चैंपियन और विश्व रिकॉर्डधारी सेबेस्टियन ने इस दौरान भारतीय एथलेटिक्स संघ की कार्यकारी बैठक और सैफ एथलेटिक्स काउंसिल की बैठक का उद्घाटन किया।

चार ओलिंपिक पदक जीतने वाले सेबेस्टियन को लगता है कि भारतीय एथलीटों में ओलंपिक पदक जीतने की क्षमता है, लेकिन यह इतना आसान भी नहीं है। उनसे बातचीत के अंश…

क्या संकट से घिरे एथलेटिक्स के लिए कोई स्वतंत्र डोपिंग रोधी संस्था बनाने की योजना है?

आईएएएफ अध्यक्ष बनने के 100 दिन के अंदर ही मैंने पांच-छह कदम उठाए हैं। हम अपने डोप परीक्षण सिस्टम में और स्वतंत्रता लाए हैं। मुझे लगता है कि अभी भी कई दिक्कतें हैं। किसी खिलाड़ी का डोप नमूना फेल होने और प्रतिबंध लगने के बीच काफी समय लगता है।

मीडिया को लगता है कि इतना समय क्यों लिया जा रहा है, लेकिन इसमें कुछ नियम और प्रोटोकॉल निभाने पड़ते हैं। किसी एथलीट के करियर को देखते हुए हम कोई चूक नहीं कर सकते, लेकिन मुझे लगता है कि हम इस प्रक्रिया को थोड़ा तेज कर सकते हैं।

एथलेटिक्स में विश्व के सबसे सफल देशों जमैका और केन्या से भारत को क्या सीखना चाहिए?

स्कूल में ट्रैक एंड फील्ड खेलों की मजबूत पकड़ होनी चाहिए। जमैका और केन्या के स्कूलों में एथलेटिक्स खेली जाती है, भारत भी ऐसा कर सकता है। मैंने कई बार जमैका गया और वहां स्कूल और कॉलेज स्तर की चैंपियनशिप को देखने के लिए 50000 से ज्यादा लोग होते हैं। मैं आईएएएफ अध्यक्ष के तौर पर देशों के शिक्षा मंत्रियों के साथ स्कूलों में ट्रैक एंड फील्ड खेलों को लेकर करार करना चाहता हूं।

भारत की यात्रा को कैसे देखते हैं?

यह किसी सदस्य देश की मेरी पहली आधिकारिक यात्रा है। मेरे लिए यह भावनात्मक यात्रा है। मेरे नाना भारतीय थे और मेरी मां का जन्म दिल्ली में हुआ था। वह दस वर्ष की उम्र तक यहां रहीं। मैं उनकी याद में भारत की यात्रा करना चाहता था और मैं यहां आकर बहुत खुश हूं। अगर मुझे समय मिला तो मैं पत्नी संग होटल मरीन जाऊंगा, जहां मेरी मां ने अपना बचपन बिताया।

भारत ओलिंपिक में एथलेटिक्स में पदक क्यों नहीं जीत सका?

विश्व चैंपियनशिप और ओलिंपिक में पदक जीतना काफी कठिन है। भारत में काफी क्षमता है और यहां के एथलीट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ कर गुजरना चाहते हैं। मुझे ऐसा नहीं लगता कि वे ये नहीं कर सकते हैं। वे इससे ज्यादा दूर नहीं हैं।

बोल्ट के रिटायरमेंट से एथलेटिक्स पर कितना असर पड़ेगा?

निश्चित ही मुहम्मद अली के बाद उसैन बोल्ट पर लोगों की सबसे ज्यादा निगाहें रहीं, लेकिन एथलेटिक्स सिर्फ बोल्ट तक सीमित नहीं है। हर खेल में कई प्रतिभाशाली एथलीट होते हैं। जब अली रिटायर हुए थे तो सभी लोग मुक्केबाजी के लिए यही कहते थे लेकिन आज भी मुक्केबाजी अपनी जगह मौजूद है।

भारत के लिए आईएएएफ की क्या योजना है?

भारत को एथलेटिक्स में प्रायोजकों को आकर्षित करने की ओर काम करना होगा। भारत में कई शीर्ष कंपनियां हैं और उन्हें इस खेल से जोड़ने की जरूरत है। प्रस्तावित भारतीय एथलेटिक्स लीग को लेकर भी काफी आशा है। मैं यही कहना चाहूंगा कि 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स काफी सफल थे और उसने भारतीय एथलेटिक्स पर काफी असर डाला है। इससे भारतीय एथलेटिक्स में बहुत सुधार हुआ है।

 
 
 
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