उसने सोचा वह अंधी हो जाए… और वह हो गई

दुsaping1-300x224निया में सबके अपने-अपने सपने होते हैं। कोई कहता है कि बड़े होकर मैं इंजीनियर बनूंगा। कोई कहता है डॉक्‍टर बनूंगा लेकिन इस दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कुछ अलग या अजीब सोचते हैं। आज एक ऐसी महिला से मिलाते हैं जो बचपन से सोचती थी कि मैं बड़ी होकर अंधी बनूंगी। बड़ी होकर उसने इस काम को अंजाम भी बखूबी दिया।
अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना की 30 साल की एक महिला ज्वैखल शपिंग ने खुद को अंधा कर लिया। उसके अंधे होने में एक मनोचिकित्सक ने भी अहम भूमिका निभाई। इस मनोचिकित्सक ने ज्वैल शपिंग की आंखों में ड्रेन क्ली नर डाल दिया। ड्रेन क्लीनर की वजह से उसकी एक आंख पूरी तरह से खराब हो गई और दूसरी आंख में मोतियाबिंद हो गया।

बचपन से थी ख्वाहिश
शपिंग ने बताया कि बचपन से ही उसकी इच्छा थी कि वह अंधी हो जाए। अंधी होने के लिए उसने तमाम कोशिशें भी कीं लेकिन उसको सफलता नहीं मिली। उसके ऊपर अंधा होने का ऐसा भूत सवार हुआ कि वह घंटों सूरज के सामने बैठकर उसको निहारती और कभी-कभी सूरज की रोशनी में टहलती भी। इसके अलावा वह अंधेरे में भी चहलकदमी करती। इन सबके अलावा वह रात में काला चश्मा पहनती।

ड्रेन क्लीनर को अपनाया
जब वह थक हार गई तो अंत में उसे एक मनोचिकित्सक मिला। इस मनोचिकित्सक ने उसकी आंख में ड्रेन क्लीनर का इस्तेमाल किया। ऐसा करते ही उसकी बचपन की ख्वाहिश पूरी हो गई।

बॉडी इंटेग्रिटी आइडेंटिटी डिसऑर्डर की वजह से पाली य‍ह इच्छा
कैरोलिना की शपिंग के मुताबिक जब वह तकरीबन 20 साल की थी तब उसने ब्रेल लिपि सीख ली। शपिंग को बॉडी इंटेग्रिटी आइडेंटिटी डिसऑर्डर है। ये एक मानसिक बीमारी है। इस अवस्था में मरीज को ये आभास होता है कि उसके शरीर का कोई एक अंग विकलांग है।

कोई मलाल नहीं
आंखें जाने का शपिंग को कोई मलाल नहीं है क्योंकि वो यही चाहती थी। शपिंग कहती हैं कि अगर कोई ये कहे कि उसने स्वार्थवश ऐसा काम किया है तो ये गलत होगा, क्योंकि ये उसकी बीमारी की जरूरत थी।

 

 

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