उत्तराखंड: चुनाव से पहले माओवादी खीम सिंह और भास्कर के सक्रिय होने की आशंका, खुफिया तंत्र अलर्ट

लोकसभा चुनाव में 50 हजार रुपये के इनामी माओवादी खीम सिंह बोरा और ढाई हजार के इनामी भास्कर पांडे के सक्रिय होने की आशंका से खुफिया तंत्र अलर्ट हो गया है। पूर्व में दोनों माओवादी नेताओं की ओर से नैनीताल और अल्मोड़ा जिले में माओवादी गतिविधियों को अंजाम दिया जा चुका है।उत्तराखंड: चुनाव से पहले माओवादी खीम सिंह और भास्कर के सक्रिय होने की आशंका, खुफिया तंत्र अलर्ट

सूत्रों के अनुसार दोनों की धरपकड़ के लिए एसओटीएफ इंटेलिजेंस की चार टीमें अल्मोड़ा और नैनीताल में सक्रिय हो गई हैं। एसओटीएफ रेंज भी जल्द सर्च अभियान चलाने की तैयारी में है। 

बता दें कि वर्ष 2004 में अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया में एक माओवादी कैंप पकड़े जाने के बाद सोमेश्वर निवासी खीम सिंह बोरा का नाम प्रकाश में आया था। इसके बाद 2014 के लोस चुनाव में नैनीताल और अल्मोड़ा जिले में माओवादियों ने चुनाव के विरोध में पर्चे चस्पा किए थे। इसमें स्थानीय लोगों ने खीम सिंह के शामिल होने की पुष्टि की थी।

वर्ष 2016 में नानीसार में खोले जा रहे एक स्कूल का विरोध भी माओवादियों ने किया था। इसमें खीम सिंह के साथ ही भास्कर पांडे का नाम सामने आया था। पुलिस और खुफिया तंत्र से बचने के लिए दोनों भूमिगत हो गए थे। 

पुलिस प्रशासन ने तब खीम सिंह पर 50 और भास्कर पांडे पर ढाई हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। सूत्रों के अनुसार लोकसभा चुनाव में माओवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए दोनों के फिर से सक्रिय होने की आशंका को देखते हुए एसओटीएफ इंटेलिजेंस की चार टीमों का गठन कर उन्हें नैनीताल और अल्मोड़ा में मुस्तैद किया गया है। साथ ही एसओटीएफ रेंज भी होली के बाद दोनों जिलों में सर्च अभियान चलाने की तैयारी में है। 

इन जगहों पर रही हैं माओवादी गतिविधियां 
नैनीताल, अल्मोड़ा और यूएसनगर माओवादी गतिविधियों के केंद्र रहे हैं। इसमें अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर, बाड़ेछीना, धौलाछीना, शहर फाटक और नैनीताल जिले के धारी, लालकुआं, चोरगलिया और पहाड़पानी क्षेत्र में माओवादी सक्रिय रहे हैं। यूएसनगर में खटीमा में भी काफी समय पहले माओवादी कैंप पकड़ा गया था। जेल में बंद हैं तीन माओवादी 
माओवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए वर्ष 2017 में माओवादी देवेंद्र चम्याल, भगवती भोज के साथ ही रमेश भट्ट और मनोज को गिरफ्तार किया गया था। इनमें से देवेंद्र, रमेश और मनोज अभी जेल में बंद हैं। खीम सिंह के खिलाफ जहां पुलिस ने करीब आधा दर्जन मुकदमे दर्ज किए हैं, वहीं भास्कर के खिलाफ भी चार से पांच मुकदमे दर्ज हैं। 

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