ई-केवाईसी से होगी 100 करोड़ मोबाइल ग्राहकों की पहचान

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार की उस योजना को हरी झंडी दे दी है जिसके तहत एक वर्ष के भीतर ई-केवाईसी (नो योर कस्टमर) के जरिए 100 करोड़ मोबाइल उपभोक्ताओं की पहचान सुनिश्चित करने की योजना है। साथ ही सरकार की ओर से शीर्ष अदालत को बताया गया कि अब आधार आधारित ई-केवाईसी के जरिए ही मोबाइल कनेक्शन देने की योजना है।
ई-केवाईसी से होगी 100 करोड़ मोबाइल ग्राहकों की पहचान 

चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल  रोहतगी ने कहा कि एक वर्ष केभीतर ई-केवाईसी(नो योर कस्टमर) के जरिए 100 करोड़ मोबाइल उपभोक्ताओं की पहचान सुनिश्चित करने की योजना है। साथ ही उन्होंने बताया कि नए कनेक्शन आधारित ई-केवाईसी के आधार पर दिए जाएंगे। 

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मोबाइल सिम का दुरूपयोग न हो इसलिए सरकार की ओर से यह पहल की जा रही है। अटॉर्नी जनरल ने बताया कि 90 फीसदी से अधिक प्री-पेड ग्राहक हैं। उन्होंने बताया कि इन ग्राहकों को समय-समय पर रिचार्ज करना होता है। ऐसे में योजना है कि रिचार्ज कराने से पहले उपभोक्ताओं की पहचान सुनिश्चित की जाएगी।

सरकार के प्रयासों से संतुष्ट होकर पीठ ने लोकनीति फाउंडेशन नामक गैर सरकारी संगठन द्वारा दायर याचिका का निपटारा कर दिया। पिछली सुनवाई केदौरान याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अशोक धमीजा ने पीठ को बताया था कि  शीर्ष अदालत केपूर्व निर्देशों के बावजूदकरीब 5 फीसदी (करीब 5.25 करोड़) मोबाइल सिम धारक की पहचान फर्जी या असत्यापित है। 

याचिका में कहा गया था कि फर्जी या असत्यापित सिम से देश की सुरक्षा को बड़ा खतरा है। अपराधी और आतंकी इसका इस्तेमाल करते हैं। हैदराबाद, मुंबई, जयपुर में हुए आतंकी हमलों में यह बात सामने आई थी कि इन वारदातों को अंजाम देने के लिए फर्जी या असत्यापित सिम का इस्तेमाल हुआ था। याचिका में कहा गया था कि सिम कार्ड जारी करने के लिए ‘आधार कार्ड’ को अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए।

 
 
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