इंफ्रास्ट्रक्चर वायब्लिटी गैप फंडिंग स्कीम के तहत अब सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर भी सरकार से मिलेगी वित्तीय मदद

इंफ्रास्ट्रक्चर वायब्लिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) स्कीम के तहत अब सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर भी सरकार से वित्तीय मदद मिलेगी। सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) के तहत स्कूल, अस्पताल का निर्माण करने पर निजी कंपनियों को केंद्र सरकार से परियोजना की कुल लागत की 30 फीसद राशि वित्तीय मदद के रूप में मिलेगी। 30 फीसद राशि राज्य सरकार देगी। बाकी की 40 फीसद लागत का वहन निजी कंपनियां स्वयं करेगी।

पानी और कचरा प्रबंधन से जुड़ी बुनियादी सुविधा के विकास पर यह भी यह नियम लागू होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने बुधवार को इंफ्रास्ट्रक्चर वीजीएफ स्कीम को वर्ष 2024-25 तक की मंजूरी दे दी। इसके तहत 8100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इनमें से 6000 करोड़ आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए जाएंगे तो 2100 करोड़ रुपए सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रखे गए हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर वीजीएफ स्कीम के तहत पहली बार सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर को शामिल किया गया है। आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पहले से वीजीएफ स्कीम चल रही है। पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में वीजीएफ स्कीम के तहत 4375 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। चालू वित्त वर्ष में 2020-21 में वीजीएफ के तहत 1400 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इनमें से 1000 करोड़ आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए तो 400 करोड़ रुपए सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रखे गए हैं।

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वित्त मंत्रालय के मुताबिक सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर को वीजीएफ में शामिल करने से नए अस्पताल, स्कूल के निर्माण में निजी कंपनियां आगे आएंगी। इससे सामाजिक क्षेत्र में निजी निवेश होगा और रोजगार में भी बढ़ोतरी होगी। वहीं आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए वीजीएफ स्कीम को जारी रखने से इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में नयी संपदा का सृजन होगा और नए निवेश आएंगे।

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