इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट के बावजूद भी एड किंग बने रहेंगे MS Dhoni

महेंद्र सिंह धोनी ने भले ही अपने रिटायरमेंट कमेंट में खुद को पल दो पल का शायर बताया, लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट के बावजूद भी वह बिजनेस एंडोर्समेंट की पिच पर पल दो पल के शायर नहीं बल्कि किसी रॉकस्टार से कम नहीं होंगे. साल 2004 में जब धोनी पहली बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आए तो उस वक्त सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ब्रांड एंडोर्समेंट की फील्ड में सबसे बड़े नाम थे. साथ ही सहवाग और युवराज सिंह भी कई ब्रांड्स पर अपना कब्जा जमाते जा रहे थे. 

उस वक्त लंबे बालों वाले धोनी को देखकर किसी ने यह अंदाजा भी नहीं लगाया होगा कि यह युवा क्रिकेटर एक दिन ब्रांड एंडोर्समेंट की रेस में सबको पीछे छोड़ देगा. यहां तक कि क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर भी उनसे पिछड़ जाएंगे. धोनी के बालों के स्टाइल और हेलीकॉप्टर शॉट खेलने की अदा ने जहां फैंस को उनका दीवाना बना दिया, वहीं बड़ी-बड़ी कपंनियां भी करोड़ों के एंडोर्समेंट ऑफर लेकर उनके बिजनेस मैनेजर्स से लगातार गुहार लगाती रहीं. 

साल 2007 टी-20 वर्ल्ड कप में धोनी पहली बार भारतीय टीम के कप्तान बने और जोहानिसबर्ग में जीत का परचम लहराया. इसके बाद तो धोनी के नाम के आगे कैप्टन कूल का टैग लग गया. अब बिजनेस की फील्ड में भी माहिर होते जा रहे धोनी ने इस टैग का भरपूर फायदा उठाया और करीब 50 कंपनियों के ब्रांड एंबेसडर बन गए. साल 2009 तक धोनी प्रति ब्रांड करीब 3 करोड़ तक वसूलने लगे. साल 2011 में भारत को वन-डे क्रिकेट का सरताज बनाने के बाद धोनी की कमाई का ग्राफ आसमान छूने लगा. अब धोनी महज एक साल में ही करीब 200 करोड़ रुपये तक कमाई करने लगे और उनकी फीस प्रति ब्रांड करीब 6 करोड़ तक जा पहुंची.

धोनी ने यहां भी उम्दा बिजनेस दांव खेला और अब वह अपने को एक मैच्योर और फैमिली मैन ब्रांड के रूप में पेश करने लगे. हांलाकि धोनी को यह अहसास हो गया कि उनसे कहीं युवा विराट कोहली के आने के बाद उन्हें अब अपने आप को फैमिली मैन के रूप में ज्यादा पेश करना होगा. ताकि 30 साल से ऊपर वाले सेगमेंट में भी उनकी लोकप्रियता बढ़ती रहे. साल 2015 में जब धोनी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया तो उन्हें यह अच्छे से मालूम था कि अब मैदान पर उनकी विजिबिलिटी कम हो जाएगी पर उन्हें एड शूट करने के लिए दिन ज्याद मिल जाएंगे.

धोनी के तेज दिमाग ने एक उम्दा बिजनेस दांव चला और उन्होंने अपनी फीस तो थोड़ी कम कर ली लेकिन अब वह ज्यादा प्रोडेक्ट्स को एंडोर्स करने लगे. ब्रांड्स भी अब धोनी को पहले से कहीं ज्यादा आसानी से हासिल कर सकते थे और वह भी पहले से कम कीमत पर. साल 2016 से 2020 के बीच ब्रांड कोहली और ब्रांड धोनी के बीच ज्यादा से ज्यादा एंडोर्समेंट हासिल करने की रेस लगने लगी. विराट कोहली ने अपनी फीस जहां प्रति एंडोर्समेंट 12 करोड़ तक कर ली, तो वहीं धोनी ने अपनी फीस 5 से 6 करोड़ के बीच ही सीमित रखी. साल 2019 में ही धोनी जहां 44 प्रोडक्ट्स के ब्रांड एंबेसडर थे तो वहीं कोहली के पास 43 प्रोडक्ट्स की एंडोर्समेंट थी. हांलाकि धोनी ने अब एक बड़ा बिजनेस दांव यह भी चला की वह कई स्टार्टअप कंपनियों जैसे Cars24 और Khatabook में 20 प्रतिशत तक के इक्विटी भी हासिल करने लगे. जो वक्त के साथ बदलते और स्मार्ट होते धोनी की पहचान भी है.

आज धोनी ने जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को पूरी तरह से गुड बाय बोल दिया है तो भी उनके पास ओरिएंट, PSPO, इंडिगो पेंट्स, टाइटन सोनाटा, बिग बाजार, जीई मनी, डाबर हनी जैसी लंबी प्रोडक्ट एंडोर्समेंट लिस्ट है. धोनी ने आईपीएल से पहले अचानक रिटायरमेंट लेकर अपने फैंस को हैरान जरूर कर दिया हो. लेकिन, इतना तो अब भी तय है कि धोनी आने वाले वक्त में भी ब्रांड एंडोर्समेंट की दुनिया में नई बुलंदियां छूते रहेंगे.

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