आबकारी विभाग ने टैक्स जमा न करने वालों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई तेज, इस जिले में बकाया है 21 करोड़ रुपये

Uttarakhand Excise Department आबकारी विभाग ने बीते तीन वर्षों से आबकारी टैक्स जमा न करने वालों के खिलाफ वसूली की कवायद तेज कर दी है। सबसे अधिक 21 करोड़ रुपये का बकाया देहरादून में है। इसे देखते हुए सचिव आबकारी सचिन कुर्वे ने जिलाधिकारी देहरादून और अपर जिलाधिकारी वित्त और राजस्व को पत्र लिखकर वसूली सुनिश्चित करने को कहा है। आबकारी महकमा इस वर्ष पहले ही खासे नुकसान से जूझ रहा है। कारण यह कि आबकारी महकमे की दुकानों का अभी तक पूरी तरह आवंटन नहीं हो पाया है।

कोरोना के अलावा इस वर्ष पर्यटन सीजन भी नहीं चल पाया। इस कारण शराब की बिक्री भी काफी कम हुई। आबकारी विभाग का इस वर्ष का राजस्व लक्ष्य 3500 करोड़ रुपये का है। इसके सापेक्ष विभाग अभी तक 1770 करोड़ रुपये ही वसूल पाया है। अब यह वित्तीय वर्ष समाप्त होने को लगभग चार माह का समय शेष बचा है। इस अवधि में शेष 1730 करोड़ की वसूली कर पाना अब संभव नजर नहीं आ रही है। विभाग को अब हर माह लाइसेंस फीस व विभिन्न टैक्स से ही पैसा मिलना है। ऐसे में विभाग ने लंबित देयकों पर नजर दौड़ानी शुरू की।

यह बात सामने आई कि बीते तीन वर्षों से तकरीबन 50 करोड़ से अधिक की राशि अभी तक वसूली नहीं जा सकी है। इसमें सबसे अधिक देहरादून के 21 करोड़, हरिद्वार में 10 करोड़, नैनीताल में छह करोड़ और तकरीबन इतनी ही राशि ऊधमसिंह नगर में वसूली जानी है। इसके अलावा शेष जिलों में भी 50 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये के देयक शेष हैं। इस दौरान यह भी देखा गया कि कई लाइसेंसधारक कोरोना काल का हवाला देते हुए इस वर्ष का शुल्क देने में कोताही बरत रहे हैं। इस पर विभाग ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है।

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नतीजतन इस वर्ष का पैसा तो विभाग को मिलने लगा है लेकिन बीते वर्षों के लंबित देयक देने में आनाकानी की जा रही है। इसे देखते हुए सचिव आबकारी ने ऐसे व्यावसायियों के खिलाफ रिकवरी के लिए कदम उठाने के आदेश जारी किए हैं। सचिव आबकारी सचिन कुर्वे का कहना है कि सभी जिलों से कहा गया है कि लंबित देयकों की वसूली में तेजी लाई जाए। इसके लिए सख्त कदम भी उठाए जाएं।

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