आप अपनी आंखों का हाल भी जान सकेंगे फटाफट, एकेटीयू कर रहा ऐसी व्यवस्था

आपने रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों का वजन करने वाली मशीनें तो देखी ही होंगी, ठीक उसी तरह आप अपनी आंखों का हाल भी फटाफट जान सकेंगे। इसके लिए सरकार की मदद से रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थलों पर आंखों की रेटिना स्कैन करने वाले कियॉस्क लगाए जाने की तैयारी है, जिससे लोग आंखों से जुड़ी बीमारियों के बारे में जान सकें। 
दरअसल, डायबिटिक रेटिनोपैथी और ग्लूकोमा आंखों से जुड़े गंभीर रोग हैं। इनके बारे में समय रहते जानकारी नहीं मिल पाती। नेत्र चिकित्सकों के मुताबिक पेनलेस और लक्षण रहित होने के कारण इन बीमारियों की समय रहते जानकारी नहीं हो पाती। जब जानकारी होती है, तब तक आंखों की रोशनी जा चुकी होती है। रिकवरी न होने से स्थाई अंधता की आशंका बढ़ जाती है।
लंबे शोध के बाद यहां होगा प्रयोग
आम आदमी तक इन बीमारियों की जानकारी समय रहते पहुंच सके, इसके लिए डॉ एपीजे अब्दुल कलाम विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के वैज्ञानिक (डीन रिसर्च) प्रो एमके दत्ता ने यूएसए, स्पेन, चेक रिपब्लिक समेत कई देशों के वैज्ञानिकों के साथ शोध के बाद कंप्यूटर बेस्ड डायग्नोस्टिक टूल तैयार किया है।
दस सेकेंड में आ जाएगी रिपोर्ट
यह टूल पूरी तरह ऑटोमेटिक है। इसे कोई भी सामान्य व्यक्ति संचालित कर सकता है। इसके जरिये आंखों की रेटिना को स्कैन कर महज 10 सेकेंड में अपनी आंखों की स्थिति जानी जा सकती है। प्रो दत्ता के साथ शहर के वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ शोभित चावला भी टूल को पब्लिक प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराने के लिए कियॉस्क की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।
एकेटीयू के वैज्ञानिक (डीन रिसर्च) प्रो एम दत्ता ने बताया कि इस पहल का एक ही उद्देश्य है कि समय रहते डायबिटिक रेटिनोपैथी व ग्लूकोमा की पहचान और इलाज हो सके, ताकि अंधेपन से बचा जा सके।
वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ शोभित चावला ने बताया कि गांव-देहात के साथ ही रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन व अन्य तमाम जगहों पर जहां नेत्र विशेषज्ञों का अभाव है, वहां के लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा। इसे कियॉस्क का रूप दिया जा रहा है। इस पर कोई भी अपनी ठुड्डी रखकर आंखों को स्कैन करेगा और 10 सेकेंड में जनरेट होकर निकली रिपोर्ट उसकी आंखों की स्थिति के बारे में बता देगी।





