आज है मुहर्रम, इस दिन मुस्लिम ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लोगों की आंखें हो जाती हैं नम

आज मुहर्रम की 10 तारीख है. इस दिन को रोज-ए-आशुरा भी कहते हैं. इस दिन मुस्लिम ही नहीं, बल्कि पूरी कायनात (दुनिया) के लोगों की आंखें नम हो जाती हैं. 
दरअसल, 1400 साल पहले इराक की सरजमी पर एक ऐसी जंग लड़ी गई थी, जिसे ‘कर्बला की जंग’ के नाम से जाना जाता है. यजीद के पत्थर दिल फरमानों से इमाम हुसैन के साथ उनके काफिले के कई लोगों ने ये जंग लड़ी थी, जिसमें सिर्फ मुसलमान ही नहीं, बल्कि ब्राह्मण हिंदू भी शामिल थे. उन्हें हुसैनी ब्राह्मणके नाम से जाना जाता है.
कौन हैं हुसैनी ब्राह्मण-
शिया मौलाना जलाल हैदर नकवी बताते हैं कि कर्बला की जंग यजीद के जुल्म के सितम के खिलाफ इमाम हुसैन ने लड़ी थी. इस जंग में मुसलमानों का बड़ा तबका यजीद के साथ था, जो हक पर थे वही हुसैन के साथ थे. ऐसे में इमाम हुसैन का साथ देने भारत के ब्राह्मण गए.
हुसैनी ब्राह्मण मोहयाल समुदाय के लोग हिंदू और मुसलमान दोनों में होते हैं. मौजूदा समय में हुसैनी ब्राह्मण अरब, कश्मीर, सिंध, पाकिस्तान, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली और भारत के अन्य हिस्सों में रहते हैं. ये लोग 10 मुहर्रम यानी आज के दिन हुसैन की शहादत के गम में माम और मजलिस करते हैं.
जल्द घट सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, यें हैं तरीका
फिल्म अभिनेता और सांसद रहे स्वर्गीय सुनील दत्त हुसैनी ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते थे.
प्रोफेसर असगर नकवी बताते हैं कि पैगंबर मोहम्मद के दौर की बात है, जब सुनील दत्त के पूर्वजों के संतान नहीं हो रही थी. उस समय वह अल्लाह के रसूल पैगंबर मोहम्मद के पास पहुंचें. दत्त परिवार ने अपनी बात रखते हुए कहा कि रसूल हमारे परिवार में औलाद नहीं हो रही है. ये सुनकर नबी ने इमाम हुसैन से कहा कि आप इनके लिए दुआ करो. उस वक्त इमाम हुसैन बच्चे थे और वे खेल रहे थे. हुसैन ने अपने हाथ उठाकर खुदा से उनके लिए दुआ की. इमाम हुसैन की दुआ के बाद दत्त परिवार में बेटे का जन्म हुआ, तभी से ये हुसैनी ब्राह्मण के नाम से पहचाने जाने लगे.





