आखिर माला में क्यों होते हैं 108 मोती, जानिए इसके पीछे की ये बड़ी वजह

14 जनवरी को खरमास समाप्त हो जाएगा. खरमास के महीने में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है. कहा जाता है कि इस दौरान किए गए पूजन का कई गुना फल प्राप्त होता है. अगर आप बहुत देर पूजा नहीं कर सकते तो रोजाना कम से कम 108 जाप तो जरूर करें. धार्मिक रूप से 108 जाप के लिए माला का प्रयोग किया जाता है क्योंकि एक माला 108 मनकों की होती है. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि माला में 108 मनके ही क्यों होते हैं. अगर नहीं, तो आइए हम आपको बताते हैं.

पौराणिक मान्यता

धार्मिक रूप से नक्षत्रों की कुल संख्या 27 होती है. हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं. यदि 27 का गुणा चार से किया जाए तो 108 की संख्या सामने आएगी. इसी गिनती के साथ ऋषि मुनियों ने 108 मनकों की माला का विधान तैयार किया. माला का एक एक दाना नक्षत्र के एक एक चरण का प्रतिनिधित्व करता है.

जाप करने का तरीका जानें

माला में सबसे ऊपर एक मनका लगा होता है उसे सुमेरु कहा जाता है. सुमेरु के पास वाले मनके से जाप प्रारंभ किया जाता है और सुमेरु के दूसरी तरफ वाले आखिरी मनके पर समाप्त किया जाता है. इसे 108 जाप का एक चक्र माना जाता है. जाप करते समय माला को मध्यमा उंगली पर रखकर अंगूठे की मदद से एक एक मनके को आगे बढ़ाया जाता है. सुमेरु को कभी भी लांघा नहीं जाता. आखिरी मनके से ही वापस पलटकर दूसरी माला का जाप शुरू कर दिया जाता है. हर माला के बाद सुमेरु को माथे पर लगाकर नमन करना चाहिए. इससे जाप का पूर्ण फल प्राप्त होता है.

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ये भी है मान्यता

माला के 108 मनकों को लेकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है. इसके अनुसार मनकों का संबन्ध सूर्य की कलाओं से है. एक वर्ष में सूर्य 216000 कलाएं बदलता है और वर्ष में दो बार अपनी स्थिति भी बदलता है. छह माह सूर्य उत्तरायण रहता है और छह माह दक्षिणायन. छह माह की एक स्थिति में 108000 बार कलाएं बदलता है. इस संख्या से पीछे के शून्यों को हटाकर 108 मनके की संख्या तय की गई है. हर मनका सूर्य की अलग अलग कला का प्रतीक है.

विष्णु भगवान के जाप के लिए तुलसी की माला

अलग अलग देवी देवताओं की पूजा के लिए अलग अलग मालाएं बनायी गई हैं, जैसे रुद्राक्ष, स्फटिक, तुलसी, हल्दी, कमलगट्रटे की माला आदि. भगवान विष्णु या उनके तमाम रूपों की पूजा के लिए तुलसी की माला का प्रयोग सर्वश्रेष्ठ माना गया है.

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