आखिर क्यों सबसे ज्यादा अविवाहित महिलाए इस्तेमाल कर रही हैं कंडोम? पढ़े पूरी खबर…

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कराए गए सर्वे में सामने आया है कि बीते एक दशक में अविवाहित महिलाओं में कंडोम के प्रयोग में छह गुना बढ़ोतरी दर्ज हुई है. एक दशक पहले जहां सिर्फ दो फीसदी अविवाहित महिलाएं कंडोम का प्रयोग करती थीं, वहीं अब लगभग 12 फीसदी महिलाएं ऐसा करने लगी हैं. यह सर्वे यौन रूप से सक्रिय 49 साल तक की अविवाहित और विवाहित महिलाओं के बीच किया गया है.

इस नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में यह भी सामने आया है कि 20 से 24 साल तक की युवतियों में कंडोम का प्रचलन सबसे ज्यादा बढ़ा है. हालांकि अब भी विवाहित-अविवाहित महिलाएं जन्म-नियंत्रण के लिए परंपरागत तरीकों को ही ज्यादा अहमियत देती हैं. सर्वे में यह भी पता चला है कि अभी भी अधिकतर पुरुष परिवार नियोजन को सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी मानते हैं.

यह पहली बार हो रहा है कि महिलाएं अपनी यौनेच्छा के प्रति हर तरह की कुंठा को नकार रही हैं और सेक्स की सहज, नैसर्गिक इच्छा के प्रति सचेत होकर व्यवहार कर रही हैं. अब से पहले यौन सक्रियता सिर्फ पुरुषों का ही अधिकार क्षेत्र समझा जाता था. हालांकि हमारे समाज में आज भी सिर्फ पुरुषों की ही निर्बाध यौन सक्रियता को सामाजिक स्वीकृति मिली हुई है. स्त्रियों की यौन सक्रियता को समाज आज भी अच्छी नजरों से नहीं देखता. हमारे समाज में पुरुषों की विवाह पूर्व यौन सक्रियता, शर्म या संकोच का विषय न होकर अपनी मर्दानगी का उत्सव मनाने जैसा है.

समाज से लेकर फिल्मों और विज्ञापनों तक में पुरुषों की अति यौन सक्रियता बहुत ही साफ तौर पर देखने को मिलती है. उदाहरण के लिए ‘राम लीला’ और ‘बुलेट राजा’ जैसी फिल्मों के नायक शादी से पहले बहुत सारी लड़कियों से यौन संबंधों की बातें बेहद फख्र से बताते हैं और फिर भी वे नायक ही बने रहते हैं. विवाह पूर्व उनकी यह अति यौन सक्रियता भी उन्हें पुरुष वेश्या या खलनायक नहीं बनाती! इसी तरह डियोड्रेंट के विज्ञापनों में एक पुरुष को कई महिलाओं से घिरा हुआ दिखाया जाता है. दूसरी तरफ विवाह पूर्व अपने यौन संबंध स्वीकार करना किसी लड़़की को चरित्रहीन या खलनायिका घोषित करने के लिए काफी है. इस कारण समाज में तो क्या, सिनेमा तक में ऐसी कोई पहल नहीं दिखती.

असल में यौन सक्रियता के लेकर लड़कियों को हमेशा एक किस्म के अपराधबोध में रखा गया है. लड़कियों के विवाह पूर्व यौन संबंधों को घर वाले अक्सर ही अपनी इज्जत से जोड़कर देखते हैं. ऐसे संबंध एक तरफ लड़की और उसके परिवार, दोनों की सामाजिक छवि पर बट्टा लगाते हैं तो दूसरी तरफ ऐसी लड़कियों की शादी में भी खासी दिक्कत आती है क्योंकि समाज में आज भी लड़की की शादी के लिए उसकी यौन शुचिता, सबसे जरूरी चीजों में से एक है. विवाह पूर्व कई लड़कियों से संबंध बना चुके अधिकतर लड़के भी अपनी पत्नी के ऐसे संबंधों को सहजता से स्वीकार नहीं करते और अपने लिए सिर्फ ‘वर्जिन’ पत्नी ही चाहते हैं. पुरुषों के संदर्भ में यौन शुचिता शब्द का अस्तित्व ही नहीं है.

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