अब लखनऊ मेट्रो रैक को अल्ट्रावायलट किरणों से किया जाएगा सैनिटाइज, केवल न्यूयार्क मेट्रो के पास ही थी यह तकनीक

कोरोना के दौर में कांटेक्ट लेस ट्रैवल कराने वाली लखनऊ मेट्रो अब एक और नई तकनीक लेकर आयी है। लखनऊ मेट्रो में अब मेट्रो रैक को अल्ट्रावायलट किरणों से सैनिटाइज किया जाएगा। अभी अल्ट्रावायलट किरणों से केवल न्यूयार्क मेट्रो को ही सैनिटाइज किया जा रहा है। भारत में लखनऊ पहली मेट्रो होगी, जिसको मशीन से निकलने वाली अल्ट्रावायलट किरणों से बैक्टीरिया और वायरस दोनों को खत्म किया जाएगा। यह तकनीक भारत में ही तैयार की गई है।

कोविड-19 के कारण लखनऊ मेट्रो भी पिछले साल मार्च से बंद चल रही थी। सितंबर 2020 में मेट्रो की शुरुआत फिर से हुई तो लखनऊ मेट्रो प्रशासन ने कोरोना वायरस को रोकने के लिए कांटेक्ट लेस ट्रैवलिंग की व्यवस्था लागू की। कोरोना वायरस को समाप्त करने के लिए लखनऊ मेट्रो अपने ट्रांसपोर्ट नगर डिपो में रोजाना हर रैक को सैनिटाइज करता था। एक दिन में एक रैक ही सैनिटाइज होने के बाद दोबारा ट्रैक पर दौड़ पाता था। अब लखनऊ मेट्रो ने पुणे की एक कंपनी के साथ मिलकर अल्ट्रा वायलट किरणों से मेट्रो को सैनिटाइज करने वाली तकनीक हासिल की है। मेट्रो ने अल्ट्रा वायलट सैनिटाइजेशन बॉक्स बनाया है। इस बॉक्स की लाइट अल्ट्रा वायलट जर्मीसीडिकल इरेडिएशन (यूवीजीआइ) पर आधारित है ।

मेट्रो डिपो में रैक के खड़े होने के बाद अल्ट्रा वायलट सैनिटाइजेशन बॉक्स के भीतर रख दिया जाता है। मेट्रो के सभी गेट भी बंद हो जाते हैं। जिससे भीतर किसी इंसान को प्रवेश न दिया जा सके। यह बॉक्स एक कोच को सात मिनट में सैनिटाइज कर देता है। जबकि सात से आठ मिनट सैनिटाइज के बाद कोच को खुला छोड़ दिया जाता है। जिससे कोच के भीतर किसी तरह का किरणों का असर न हो। इस मशीन को रिमोट से संचालित किया जाता है। अपने दोनों तरफ यह मशीन अल्ट्रा वायलट किरणों से सीटों, शीशे, हैंडल सहित सभी स्थानों को सैनिटाइज कर देती है। लखनऊ मेट्रो के अधिकारियों के मुताबिक यह प्रणाली बहुत ही सुरक्षित है। वहीं सामान्य सैनिटाइजर के खर्च से 40 प्रतिशत तक की बचत होती है। 

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