अपराधियों की ‘खुशामद’ में जुटी पुलिस

एजेन्सी/बहुत ही आम जुमला है कि ‘अपराधी कोई पेट से नहीं आता, समाज की कुछ दुश्वारियां भी इसके लिए जिम्मेदार होती हैं।’ व्यवहारिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो ये बात एकदम सच लगती है। शायद इसीलिए औरंगाबाद पुलिस ने फैसला लिया कि अपराध को खत्म करने के लिए अपराधियों को खत्म करने के बजाय उन्हें सुधारेंगे।
जाहिर है जब अपराधी ही सुधर जाएंगे तो अपराध करने वाले होंगे ही नहीं और समाज में चैन-अमन के साथ लोग गुजर-बसर कर सकेंगे। मौजूदा हालात में ये बात हालांकि बड़ी है दूर की कौड़ी लगती है लेकिन महाराष्ट्र के औरंगाबाद में जो कोशिश शुरू हुई है वो काबिल-ए-तारीफ है।
दूसरे सूबों की पुलिस को भी औरंगाबाद पुलिस की ‘क्रिमिनल अडॉप्शन स्कीम’ की सराहना करनी चाहिए और आत्मसात भी।





