हार्ट फेलियर के मरीजों को दर्दनाक टेस्ट से मिलेगा छुटकारा

हार्ट फेलियर से जूझ रहे मरीजों के लिए चिकित्सा जगत से एक बेहद राहत भरी खबर आई है। अब मरीजों के खून में ऑक्सीजन का स्तर जांचने के लिए दर्दनाक और जोखिम भरी प्रक्रियाओं से गुजरना नहीं पड़ेगा। एक नई रिसर्च के मुताबिक, अब केवल एक नियमित एमआरआई (MRI) स्कैन से ही यह काम आसानी से और सुरक्षित तरीके से हो सकेगा। यहां जानिए कि यह नई तकनीक मरीजों के लिए कैसे वरदान साबित हो सकती है।

पुरानी और जोखिम भरी प्रक्रिया से मुक्ति

अब तक ‘एडवांस्ड हार्ट फेलियर’ के मरीजों की स्थिति की गंभीरता समझने के लिए डॉक्टर यह देखते थे कि दिल के दाहिनी ओर लौटने वाले खून में कितनी ऑक्सीजन बची है। इसके लिए मरीजों को ‘राइट हार्ट कैथेटराइजेशन’ नामक टेस्ट से गुजरना पड़ता था।

इस प्रक्रिया में दिल के अंदर एक ट्यूब डाली जाती है, जो कि एक ‘इनवेसिव’ प्रक्रिया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह प्रक्रिया विशेष रूप से बुजुर्गों और बीमार मरीजों के लिए काफी जोखिम भरी हो सकती है।

नई एमआरआई तकनीक

नई एमआरआई विधि पूरी तरह से बिना चीर-फाड़ वाली है। इसकी खास बातें निम्नलिखित हैं:

रेडिएशन का खतरा नहीं: यह सीटी स्कैन से ज्यादा सुरक्षित है क्योंकि इसमें हानिकारक आयनीकरण विकिरण का उपयोग नहीं होता।
सुई या ट्यूब की जरूरत नहीं: यह चुंबकीय क्षेत्रों और रेडियो तरंगों का उपयोग करके दिल की 3D तस्वीरें लेती है।
बेहतर परिणाम: यह इकोकार्डियोग्राफी से बेहतर मानी गई है, क्योंकि यह दिल की मांसपेशियों को हुए नुकसान और सूजन का ज्यादा सटीक पता लगाती है।

कैसे काम करती है यह तकनीक?

इस नई विधि के बारे में ‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी’ में विस्तार से बताया गया है। इसमें एक नियमित एमआरआई मैपिंग तकनीक, जिसे ‘टी2 मैपिंग’ कहा जाता है, का उपयोग किया जाता है।

यूके के ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय और नॉरफॉक व नॉर्विच विश्वविद्यालय अस्पताल के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. पंकज गर्ग ने बताया कि अलग-अलग ऑक्सीजन स्तर वाले खून का व्यवहार चुंबकीय क्षेत्र में अलग होता है। इसी आधार पर उन्होंने एक ऐसा फॉर्मूला तैयार किया जो बिना खून का नमूना लिए ऑक्सीजन की सटीक रीडिंग बता देता है।

630 मरीजों पर हुआ सफल परीक्षण

इस तकनीक की सटीकता जांचने के लिए व्यापक स्तर पर शोध किया गया:

प्रारंभिक चरण: सबसे पहले 30 मरीजों पर इसका परीक्षण किया गया। नतीजे चौंकाने वाले थे क्योंकि एमआरआई से मिली रीडिंग और पुरानी कैथेटर वाली प्रक्रिया की रीडिंग लगभग एक जैसी थीं।
विस्तृत अध्ययन: इसके बाद हार्ट फेलियर के 630 नए मरीजों का विश्लेषण इस एमआरआई विधि से किया गया और तीन साल तक उन पर नजर रखी गई।

जिन मरीजों की एमआरआई रिपोर्ट में स्वस्थ ऑक्सीजन रीडिंग आई, उनके अस्पताल में भर्ती होने या जान जाने की संभावना काफी कम पाई गई।

भविष्य के लिए एक ‘गेम चेंजर’

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज एडवांस्ड हार्ट फेलियर के इलाज में एक ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है। यह तकनीक भविष्य में हजारों मरीजों को जोखिम भरे ट्यूब टेस्ट से बचा सकती है।

लेखकों ने इसे CMR-SvO2 (कार्डियोवास्कुलर मैग्नेटिक रेजोनेंस मिक्स्ड वेनस सैचुरेशन) का नाम दिया है। यह विधि डॉक्टरों को कमजोर मरीजों का आकलन अधिक बार और सुरक्षित तरीके से करने की अनुमति देती है, जिससे समय रहते सही इलाज शुरू किया जा सके।

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