हरीश रावत के स्टिंग से उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल लाने के बाद अब उमेश कुमार ने चली नई चाल

एक इलेक्ट्रानिक न्यूज चैनल के सीईओ उमेश शर्मा ने आरोप लगाया कि त्रिवेंद्र रावत सरकार ने उन्हें निराधार फंसाया था।हरीश रावत के स्टिंग से उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल लाने के बाद अब उमेश कुमार ने चली नई चाल

बकौल उमेश शर्मा ‘एफआईआर में लिखा था कि उमेश शर्मा स्टिंग कर सकते हैं और फिर सरकार को ब्लैकमेल करेंगे। मगर, स्टिंग हो चुका था। इसी के प्रसारण को रोकने के लिए सरकार ने मुझे फंसाया।’ ये सब बातें उन्होंने दिल्ली प्रेस क्लब में एक पत्रकार वार्ता में कहीं।

उमेश शर्मा ने 10 अगस्त को देहरादून और 19 नवंबर को रांची (झारखंड) में दर्ज राजद्रोह के मुकदमे को निराधार बताया। उन्होंने सीएम के भाई पर रुपए लेकर खनन के पट्टे दिलाने का आरोप लगाते हुए ऐसा एक स्टिंग कराने का दावा किया।

स्टिंग का कुछ हिस्सा स्क्रीन पर भी दिखाया

उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले अमृतेश चौहान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से मिलते जुलते हैं। अमृतेश ने नोटबंदी के दौरान सीएम के रिश्तेदारों के खातों 25 लाख रुपये जमा कराए थे। यह स्टिंग भी आयुष गौड़ ने ही किया था। उन्होंने स्टिंग का कुछ हिस्सा स्क्रीन पर भी दिखाया।

जिस स्टिंग की बात की गई है वो मैंने ही किया था। सीएम के परिवार को फंसाने के लिए मुझे कहा था कि किसी तरह पैसे देकर स्टिंग कर लूं। अगर पैसे न दे सकूं तो किसी तरह से उनसे काम किए जाने का आश्वासन ले लूं। मुझ पर काफी दबाव भी डाला गया था।

मुझे पता चला है कि मेरे नाम का इस्तेमाल कर एक ऑडियो प्रेस क्लब दिल्ली में सुनाया गया है। इसमें काफी छेड़खानी की गई है। ये भी प्रचारित किया है कि मैंने सीएम उत्तराखंड को पैसा दिया है, यह झूठा आरोप है।

31 दिन देहरादून जेल में रहे थे उमेश कुमार

न्यूज चैनल के सीईओ उमेश कुमार को स्टिंग ऑपरेशन की आड़ में ब्लैकमेलिंग के आरोप में देहरादून की राजपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उन्होंने कई षडयंत्र रचकर सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया। 

उमेश यहां देहरादून जिला कारागार सुद्धोवाला में 31 दिन रहकर बाहर आए थे। हालांकि, इसके बाद उन्हें देशद्रोह के एक मामले में पुलिस रांची लेकर रवाना हो गई थी। लगभग डेढ़ माह देहरादून और रांची में उठापटक झेलने के बाद उमेश शर्मा कानूनी शिकंजे से बाहर आ सके थे। हालांकि, देहरादून में उनके खिलाफ मुकदमा अब भी चल रहा है। 

कब क्या हुआ

10 अगस्त 2018-चैनल के इन्वेस्टिगेशन एडिटर की तहरीर पर राजपुर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। 
28 अक्तूबर 2018-बेहद गोपनीय तैयारियों के बीच उमेश कुमार को उनके गाजियाबाद स्थित घर से गिरफ्तार किया गया। 
01 नवंबर 2018-पुलिस ने उमेश शर्मा का सात घंटे का कस्टडी रिमांड पाया। उस दिन उन्हें मसूरी रोड स्थित उनके मकान में ले जाया गया, जहां से पुलिस खाली हाथ लौटी। 
02 नवंबर 2018- पुलिस ने कस्टडी रिमांड के लिए दोबारा अर्जी लगाई, मगर न्यायालय ने खारिज कर दी। 
03 नवंबर 2018- साल 2007 के एक मुकदमे में पुलिस ने उमेश शर्मा के खिलाफ वारंट लेने को अर्जी लगाई। 
27 नवंबर 2018- सीजेएम कोर्ट ने उमेश शर्मा की जमानत अर्जी खारिज की। 
29 नवंबर 2018- उमेश शर्मा को सेशन कोर्ट ने सशर्त जमानत दी। 
29 नवंबर 2018- रात 10 बजे उमेश शर्मा को लेकर देहरादून पुलिस रांची चली गई।
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