हरियाणा में एक बार फिर जाट आरक्षण आंदोलन शुरू, 55 पैरामिलिट्री कंपनियां तैनात

एजेंसी/
हरियाणा में जाट समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। रविवार को जाटों ने ऐलान किया है कि 15 जून तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो फिर प्रदर्शन तेज होगा। जाट नेताओं ने आंदोलन को दूसरे राज्यों में भी शुरू करने की धमकी दी है।
उधर, प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए हरियाणा ने राज्य के सभी जिलों में अर्द्धसैनिक बलों की 55 कंपनियां तैनात की हैं। सरकार ने दावा किया है कि जाट प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए पूरी तैयारियां की गई हैं। हालांकि अभी तक राज्य से हिंसा की किसी प्रकार की कोई सूचना नहीं है। प्रदर्शनकारी रेलवे ट्रैक, राजमार्गों पर न पहुंच पाएं, इस पर प्रशासन ने सख्त इंतजाम किए हैं। पिछली बार प्रदर्शनकारियों ने इन जगहों पर विशेष रूप से टारगेट किया था।
इस बार प्रदर्शनकारियों ने मुख्यतः ग्रामीण इलाकों पर अपना फोकस किया है। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राम निवास ने रविवार को बताया, ‘CRPF, RAF, ITBP और BSF की 55 कंपनियों को हरियाणा के हर जिलें में तैनात की गई हैं। हमने लोगों से शांतिपूर्वक अपना विरोध जाहिर करने के लिए कहा है।’ उन्होंने कहा, ‘जो लोग बिना प्रशासन से इजाजत लिए धरना प्रदर्शन करेंगे, उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’
जाट नेताओं के एक बार फिर से आंदोलन के मद्देनजर रविवार को पूरा हरियाणा हाई अलर्ट पर कर दिया गया है। पहले आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को ध्यान में रख रोहतक, सोनीपत समेत हरियाणा के कई शहरों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। इस बार कई जाट खाप आंदोलन में शामिल नहीं हो रही हैं। आरक्षण के मुद्दे पर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने राज्य के 15 जिलों में फिर से शांतिपूर्ण धरना देने की घोषणा की है।
सोनीपत जिले में पश्चिमी यमुना बांध की रक्षा करने के लिए पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है। कई जिलों में अधिकारियों ने धरना देने वालों को स्पष्ट किया है कि अगर इस दौरान आंदोलन उग्र हुआ तो आयोजनकर्ताओं को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।
हरियाणा में जाट समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। रविवार को जाटों ने ऐलान किया है कि 15 जून तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो फिर प्रदर्शन तेज होगा। जाट नेताओं ने आंदोलन को दूसरे राज्यों में भी शुरू करने की धमकी दी है। उधर, प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए हरियाणा ने राज्य के सभी जिलों में अर्द्धसैनिक बलों की 55 कंपनियां तैनात की हैं। सरकार ने दावा किया है कि जाट प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए पूरी तैयारियां की गई हैं। हालांकि अभी तक राज्य से हिंसा की किसी प्रकार की कोई सूचना नहीं है। प्रदर्शनकारी रेलवे ट्रैक, राजमार्गों पर न पहुंच पाएं, इस पर प्रशासन ने सख्त इंतजाम किए हैं। पिछली बार प्रदर्शनकारियों ने इन जगहों पर विशेष रूप से टारगेट किया था।
इस बार प्रदर्शनकारियों ने मुख्यतः ग्रामीण इलाकों पर अपना फोकस किया है। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राम निवास ने रविवार को बताया, ‘CRPF, RAF, ITBP और BSF की 55 कंपनियों को हरियाणा के हर जिलें में तैनात की गई हैं। हमने लोगों से शांतिपूर्वक अपना विरोध जाहिर करने के लिए कहा है।’ उन्होंने कहा, ‘जो लोग बिना प्रशासन से इजाजत लिए धरना प्रदर्शन करेंगे, उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’
जाट नेताओं के एक बार फिर से आंदोलन के मद्देनजर रविवार को पूरा हरियाणा हाई अलर्ट पर कर दिया गया है। पहले आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को ध्यान में रख रोहतक, सोनीपत समेत हरियाणा के कई शहरों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। इस बार कई जाट खाप आंदोलन में शामिल नहीं हो रही हैं। आरक्षण के मुद्दे पर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने राज्य के 15 जिलों में फिर से शांतिपूर्ण धरना देने की घोषणा की है।
सोनीपत जिले में पश्चिमी यमुना बांध की रक्षा करने के लिए पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है। कई जिलों में अधिकारियों ने धरना देने वालों को स्पष्ट किया है कि अगर इस दौरान आंदोलन उग्र हुआ तो आयोजनकर्ताओं को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।
हिसार व कई जिलों में पुलिस व पैरामिलिट्री फोर्स ने फ्लैग मार्च किया। जाट नेता आरक्षण के अलावा आंदोलन के दौरान दर्ज सभी केस रद्द किए जाने और जेल में बंद आंदोलनकारियों को रिहा करने की मांग कर रहे हैं।





