हरसिमरत कौर बादल को लोकसभा सीट से कर्ज़ के कारण आत्महत्या करने वाले दो किसानों की विधवाएं देंगी चुनौती

पंजाब में लोकसभा चुनाव में किसानों का मुद्दा गर्माता हुआ दिख रहा है। इससे पंजाब के चुनावी माहौल में नया टि्वस्ट आ सकता है। केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल को उनकी बठिंडा लोकसभा सीट से कर्ज़ के कारण आत्महत्या करने वाले द किसानों की विधवाएं चुनौती देंगी। इससे फिलहाल चुनाव में गौण किसानों के आत्महत्या का मामला उभर सकता है।
इन दोनों विधवाओं के लिए किसान आत्महत्या पीड़ित कमेटी की ओर से फंड इकट्ठा कर नामांकन के लिए जमानत राशि का इंतजाम किया जा रहा है। दोनों सोमवार को अपने नामांकन पत्र दाखिल करेंगी। किसान आत्महत्या पीड़ित कमेटी के अनुसार, उनके नामांकन दाखिल करवाने के लिए आत्महत्या करने वाले किसानों की 500 से अधिक विधवाएं व उनके समर्थक बठिंडा पहुंचेंगे।
मानसा जिले के गांव रल्ला की वीरपाल कौर और ख्याला कला की मनजीत कौर ने शिरोमणि अकाली दल की प्रत्याशी हरसिमरत कौर बादल, कांग्रेस के अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और पीडीए के सुखपाल सिंह खैहरा को चुनौती देने का फैसला किया है। उनका कहाना है कि इस चुनाव में कोई राजनीति दल या नेता किसानों की कर्जमाफी और किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्या का कोई मुद्दा नहीं उठा रहे हैं। एेसे में इन किसानों के मुद्दों को उठाने के लिए उन्होंने चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है।
वीरपाल कौर के परिवार में तीन लोगों ने कर्ज के बोझ तले दबे होने के कारण आत्महत्या की है। इसके बावजूद वीरपाल आज भी चार लाख रुपये के कर्ज के बोझ से दबी हुई हैं। वीरपाल का कहना है कि उन्हें सरकार की ओर से आत्महत्या करने वाले किसानों के लिए दी जाने वाली सहायता राशि भी नहीं दी गई है और न ही मौजूदा सरकार द्वारा किसानों का पूरा कर्ज माफ करने की नीति का कोई लाभ मिला है।
वीरपाल कौर की पति धर्मवीर, उसके ससुर नछत्तर सिंह और पिता कृष्ण चंद ने कर्ज के बोझ के कारण आत्महत्या कर ली थी। वीरपाल कौर पर दोहरी मार यह पड़ी। पति और ससुर की मौत के बाद उसे अपने ससुराल में भी रहने को जगह नहीं मिली और वह आज अपने दो बच्चों के साथ भाई के साथ रहती हैं।
वीरपाल कौर ने कहा कि इस चुनाव में किसानों की आत्महत्या का मामला किसी भी राजनीतिक पार्टी के एजेंडे में नहीं है। न ही कोई नेता इस पर बात कर रहा है। सरकार उन किसानों को पूरा कर्ज माफ करने के दावे कर रही है जिन परिवारों में कोई आत्महत्या हुई है लेकिन मेरे परिवार में तो तीन मौतें होने के बावजूद कोई राहत राशि नहीं दी गई।
लगभग यही हाल मनजीत कौर का भी है। मनजीत कौर ढाई लाख के कर्ज से आज भी दबी हुई हैं। उन्हें भी किसी प्रकार की कोई कर्जमाफी जैसी राहत नहीं दी गई है। मनजीत कौर के पति सुखदेव सिंह ने भारी कर्ज के कारण आत्महत्या कर ली थी।
जमानत राशि भरने के लिए भी पैसे नहीं ,कमेटी ने जुटाई राशि
वीरपाल और मनजीत कौर के पास चुनाव में नामांकन के लिए जमानत राशि के 25000 रुपये की राशि भी नहीं हैं। ऐसे में आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों की मदद के लिए बनी कमेटी की ओर से गांव-गांव और घर घर से राशि जुटाई गई है। इन दोनों परिवारों के लिए यह राशि कमेटी की मेंबर किरनजीत कौर ने इकट्ठी की है ।
किरनजीत कौर ने बताया कि ऐसे पीड़ित परिवारों के लिए चुनाव में उतरना कोई आसान काम नहीं है । उन्होंने बताया की यह राशि किस तरह से इकट्ठी की गई है, यह वही जानती हैं। अभी तो यह शुरुआत हे। हम यह लड़ाई चुनाव जीतने या हारने के लिए नहीं लड़ रहे हैं बल्कि हमारी लड़ाई सिस्टम से है। हमारा उद्देश्य है कि जो सिस्टम कारपोरेट घरानों के कर्ज़ों को एनपीए दिखाकर माफ करने की बात करता है, उसके कर्ताधर्ताओं को कम से कम इस तरह के परिवारों की व्यथातो पता चले। उन्होंने कहा, हम मानते हैं कि चुनाव में खड़े धनाढ्य परिवारों का मुकाबला नहीं कर पाएंगे, लेकिन यह लड़ाई जीत नहीं मुद्दे की है।





