सुप्रीम कोर्ट में राफेल पर तीखी बहस, AG दे रहे हैं प्रशांत भूषण के आरोपों का जवाब

राफेल विमान सौदे में कथित घोटाले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में डाली गई पुनर्विचार याचिका पर आज सुनवाई हुई. शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सबसे पहले वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने अपनी बात रखी. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से गलत दस्तावेज़ पेश किए हैं, जिसपर कार्रवाई होना जरूरी है. कोर्ट में सुनवाई के दौरान तीखी बहस हुई, प्रशांत भूषण की तरफ से लगाए गए आरोपों का जवाब AG केके वेणुगोपाल राव ने दिया.
प्रशांत भूषण ने लगाए गंभीर आरोप
प्रशांत भूषण ने इस दौरान तर्क दिया कि राफेल विमान सौदे से पहले सुरक्षा समिति की बैठक 2017 में हुई थी, ऐसे में सौदे को लेकर कोई बैठक नहीं की गई थी. लेकिन अदालत में इस बैठक को लेकर गलत दावा पेश किया गया था. सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने मैग्ज़ीन और अखबार के कुछ दस्वावेज़ भी पेश किए, जिसके आधार पर पुनर्विचार याचिका दायर की गई है.
उन्होंने आरोप लगाया है कि इस सौदे को फाइनल करने की तय प्रक्रिया के कई प्रावधान भी सरकार ने अपनी सुविधा के मुताबिक हटा दिए. उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ जब डील की प्रक्रिया चल रही थी, तो पीएमओ की तरफ से अलग से डील की जा रही थी.
सरकार की तरफ से AG ने दिया जवाब
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प्रशांत भूषण के आरोपों का जवाब देते हुए AG केके वेणुगोपाल ने कहा कि पुनर्विचार याचिका में कुछ भी नया नहीं है, सिर्फ चोरी किए कागजातों को जोड़ा गया है. उन्होंने कहा कि अगर किसी ने कागज ही चोरी नहीं किए होंगे, तो वह फोटोस्टेट कहां से लाया होगा. उन्होंने तर्क दिया कि 23 सितंबर, 2016 को दो सरकारों के बीच समझौता हुआ था.
आपको बता दें कि इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के. एम. जोसेफ भी शामिल हैं.
केंद्र दाखिल कर चुकी है हलफनामा
केंद्र सरकार पहले ही पुनर्विचार याचिका को लेकर अपना जवाब दाखिल चुकी है. केंद्र सरकार ने एक बार फिर अपनी पुरानी दलीलों को दोहराया है. वहीं याचिकाकर्ताओं ने भी अपने हलफनामे में केंद्र पर निशाना साधा था और CAG की रिपोर्ट में कई खामियां गिनाई थीं.
राफेल विमान सौदे में कथित घोटाले का आरोप लगाकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार को घेर रहे हैं. अदालत में दाखिल की गई पहली याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान सौदे की प्रक्रिया को क्लीन चिट दे दी थी. हालांकि, बाद में फैसले पर सवाल खड़े करते हुए प्रशांत भूषण, अरुण शौरी समेत अन्य लोगों ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी.





