साक्षात्कार: एक्सपर्ट डॉक्टरों के पैनल को मिले कोरोना नियंत्रित करने की कमान: डॉ पी के गुप्ता
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में कोरोना के आंकड़े 40 हज़ार के पार पहुंच चुके हैं। रविवार को अकेले राजधानी में 392 कोरोना संक्रमित सामने आए वहीं सोमवार को भी इनकी संख्या 282 रही। इस संवेदनशील स्थिति पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन लखनऊ के पूर्व अध्यक्ष डॉ पी के गुप्ता से विशेष बातचीत की है। उनका मानना है कि कोरोना को नियंत्रित करने की रणनीति बनाने का काम सचिवालय या प्रशासनिक अफसरों के बजाय डॉक्टरों के एक्सपर्ट पैनल को मिलना चाहिए। तभी हालात जल्दी सुधरेंगे। इसके अलावा उन्होंने यह भी स्वीकारा है कि कोरोना से डॉक्टर भले न डरा हो लेकिन शुरुआती दिनों में इसका इतना सख्त प्रोटोकॉल बना दिया गया कि निजी क्षेत्र के डॉक्टर घबरा गए और कोरोना संक्रमण को ठीक करने की जहमत उठाना मुनासिब नहीं समझा। इसलिए हालात बेकाबू होते गए –
प्रश्न- आपलोग बार-बार इस बात पर क्यों ज़ोर दे रहे थे कि सरकार होम क्वारंटाइन की इजाज़त दे.
उत्तर- निश्चित तौर से यह बड़ा सामयिक प्रश्न है और आईएमए ने यह कहा है कि होम आइसोलेशन की इजाज़त दी जाए। इसकी वजह यह है कि जैसे-जैसे संख्या बढ़ती जा रही थी, टेस्टिंग बड़ी संख्या में हो रही थी, छुपे हुए कोरोना संक्रमण के मामले अब सामने आ रहे हैं। संख्या बढ़ती जा रही है। कोविड केयर सेंटर फुल होने की नौबत आ गई है। निश्चित तौर पर यह स्थिति काफी गंभीर होगी। लोगों में भय बढ़ता जा रहा है, इसीलिए हमने कहा कि जो बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमित हैं, उन्हें होम आइसोलेशन की इजाज़त दी जाए। जिन लोगों के पास सेपरेट वाशरूम हो, सुविधा हो, उन्हें ये इज़ाज़त दी जाए और स्वास्थ्य विभाग द्वारा उनकी निगरानी की जाए।हम सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हैं, जो उन्होंने अब कुछ शर्तों के साथ इसकी अनुमति दे दी है.
प्रश्न- अभी यह स्थिति आ गई है कि लोगों को सरकारी कोविड केयर सेंटर में बेड नहीं मिल रहे हैं, उन्हें इंतेज़ार करना पड़ रहा है। कानपुर से खबर थी कि प्राइवेट हॉस्पिटल में पैसा देकर भी बेड नहीं मिल रहे हैं।
उत्तर- निश्चित तौर पर प्राइवेट हेल्थ केयर सेंटर को परमीशन बहुत देर में मिली। लेकिन डॉक्टर कोरोना को ठीक करने की पहले से बात करते थे। लेकिन कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना प्रैक्टिकल रूप से कठिन था। लोगों ने अपने हाथ खड़े कर दिए। अब सरकार ने इस बात को स्वीकार करते हुए निजी क्षेत्र को आगे आने को कहा है। हमलोग सरकार के साथ खड़े हैं। लोगों को मदद कर रहे हैं। लेकिन संख्या बढ़ती जा रही है और लोगों में भय का माहौल है। लोगों को लग रहा है कि पॉजिटिव पाए जाने पर सीधा हॉस्पिटल में डाला जाएगा। ये भय है।
प्रश्न- ये जो होटलों में सरकार ने इंतज़ाम किया है, ये बहुत खर्चीला है, तो ये क्यों किया गया, आपको क्या लगता है।
उत्तर- होटलों में जब सरकार ने इंतज़ाम किया उसके पहले ही आईएमए ने ये लिख दिया था कि होम क्वारंटाइन की सुविधा दी जाए। इससे लोगों का पैसा बचेगा। हो लोग इसे अफ़्फोर्ड कर सकते हैं, वो लाभान्वित होंगे। ये अच्छा कदम होगा। जो ये सुविधा अफ़्फोर्ड नहीं कर सकते या बीपीएल श्रेणी में आते हैं, उन्हें सरकारी सुविधा दी जाए। होटल की व्यवस्था को हम समर्थक नहीं है।
प्रश्न- आपने शुरू में टेस्टिंग की बात की है कि बड़े पैमाने पर हो रही है। लेकिन कई टेस्टिंग सेंटरों पर पैसा लेकर गलत रिपोर्ट देने की बात सामने आई है।
उत्तर- मैं इस बात का खंडन करता हूँ। आईएमए का कोई भी सदस्य डॉक्टर इस तरीके के कृत्य नहीं कर सकता है। दूसरी बात इसकी गाइड लाइन ऐसी है कि बिना आईसीएमआर के अप्रूवल के कोई भी ये टेस्ट नहीं कर सकता है। कोई भी लैब अगर ऐसा कृत्य कर रही है तो सरकार कड़ा एक्शन ले। महामारी अधिनियम के तहत उनको जेल में डाले। हमारी आईएमए की तरफ से ये मांग है।
प्रश्न- हमारी निश्चत सूचना है कि केजीएमयू में कई ऐसी मशीनें हैं जो आईसीएमआर अप्रूव नहीं है और बाजार में कई ऐसी किट्स भी आ गयी हैं जो अप्रूव नहीं हैं लेकिन इस्तेमाल हो रही हैं। इसलिए फाल्स नेगेटिव रिपोर्ट भी आ रही है।
उत्तर- फाल्स नेगेटिव की बात नहीं है। जो वर्तमान टेस्टिंग विकल्प हैं उनमें आरटी पीसीआर है, ट्रूनेट मशीन से जांच है, रैपिड एंटीजन टेस्ट, आदि शामिल हैं। कोई भी आईसीएमआर की गाइड लाइन से इतर काम करते पाया जाए तो सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रश्न- आईएमए का बयान है कि ये कम्युनिटी स्प्रेड है तो इसका आम आदमी के लिए क्या मतलब होता है।
उत्तर- कम्युनिटी स्प्रेड का मतलब हुआ कि अब कांटेक्ट ट्रेसिंग की आवश्यकता नहीं है। पहले ये था कि विदेश से आने की हिस्ट्री थी। ट्रेवल हिस्ट्री थी। ट्रेकिंग आसान थी। स्त्रोत पता लग सकता था। लेकिन अब बड़ी संख्या में लोग पॉजिटिव आ रहे हैं, ये पता ही नहीं लग रहा है कि इसका स्त्रोत कहाँ से है। तो उसको हम कम्युनिटी स्प्रेड कहते हैं। अभी ये ऑफिशियली घोषित नहीं हुआ है लेकिन ये मान कर चल रहे हैं कि बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हैं लेकिन जांच के अभाव में पता नहीं चल रहा है। तो एक अनुमान के मुताबिक ये कहा जा सकता है कि कम्युनिटी स्प्रेड की तरफ हम जा रहे हैं।
प्रश्न- इसका आम नागरिक के लिए क्या मतलब है। क्या सावधानी रखना उचित होगा।
उत्तर- इस स्थिति में सावधानी की आवश्यकता है। सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क का प्रयोग, भीड़ भाड़ की जगह पर न जाएं, सुरक्षा कवच को मज़बूत करें, इम्युनिटी स्ट्रांग करें। ऐसे भी मामले सामने आए की जांच में लोगों के एंटीबाडी कोरोना पॉजिटिव आये, इसका अर्थ हुआ उनको कोरोना हुआ और ठीक भी हो गया। ये टेस्टिंग की संख्या जितनी बढ़ेगी, उतना आंकड़ा बढ़ेगा। घबराने की आवश्यकता नहीं है। लोग डर रहे हैं कि पॉजिटिव आये तो कोविड केयर सेन्टर जाना होगा, बेड मौजूद नहीं हैं। इसीलिए बार-बार आईएमए होम आइसोलेशन की मांग कर रही थी। सरकार चाहे तो इसे पहले किसी क्षेत्र विशेष में लागू करके उसके परिणाम देख ले और फिर पूरे प्रदेश में लागू करे।
प्रश्न- ये जो कहा जा रहा है कि कोरोना का वायरस हवा में है, इसका क्या मतलब है। लोग पार्कों या सड़कों पर न जाएं।
उत्तर- अभी ये बात सटीक रूप से सामने नहीं आई है कि ये हवा में तैर रहा है। ये ड्रापलेट है जो दो मीटर तक जा सकता है, इसीलिए दो गज की दूरी बताई गई है। अभी हवा में नहीं है। पैनिक होने की जरूरत नहीं है। खुले में लोग वाक भी कर सकते हैं। इतनी दहशत की जरूरत नहीं है।
प्रश्न- यूपी का जो स्वास्थ्य इंफ़्रा है और डॉक्टरों व नर्सों की संख्या कम है, तो आप इसके लिए क्या सुझाव देंगे.
उत्तर- आईएमए की तरफ से हमलोग बार बार प्राइवेट डॉक्टर्स की बात करते हैं। हालांकि 70 प्रतिशत केयर निजी क्षेत्र देता रहा है। नॉन-कोविड मरीजों को बड़ी संख्या में निजी क्षेत्र ही इलाज उपलब्ध कर रहा है। आईएमए के साथ संवाद बनाकर सरकार चले और चल भी रही है। हमने हेल्पलाइन शुरू की है। लोगों को जागरूक किया है। होम आइसोलेशन के मरीजों को स्थानीय डॉक्टर देख सकें, इस बात की इजाज़त हो। जो लोग एमसीआई या आयुष मंत्रालय से पंजीकृत हैं वो इन मरीजो को देख सके। इसकी इज़ाज़त मिलनी चाहिए। सरकार होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजो को पल्स ऑक्सोमीटर, बीपी मशीन, थर्मामीटर उपलब्ध कराए। या वो खरीद लें, ये होटल आइसोलेशन से सस्ता और अच्छा तरीका है।
प्रश्न- आपने नॉन कोविड पेशंट की बात की, ये भी एक बड़ी समस्या है कि जो दूसरे मर्ज हैं, जिनमे किडनी, हार्ट, सांस आदि के मरीज शामिल हैं उनके मरीजो को न सरकारी सेवा मिल पा रही न प्राइवेट सेवा मिल पा रही है।
उत्तर- बिल्कुल ये बहुत बड़ी समस्या हमने फेस की। सरकार ने परमीशन दी तो ओपीडी खुली। नर्सिंग होम खुले। समस्या तो बहुत बड़ी थी। लोगों ने काफी झेला। पर धीरे-धीरे स्थिति सुधर रही है। निजी क्षेत्र के डॉक्टरों को प्रोत्साहित करना चाहिए। उनका इलाज करना चाहिए। शुरुआत में जिन्होंने इलाज किया और कोई कोविड रोगी निकल तो कार्रवाई हुई, इससे डॉक्टर डर गए। डॉक्टर वायरस से नहीं डरा लेकिन प्रोटोकॉल से डर गया तो इसलिए बहुत बड़ी समस्या हुई लेकिन समय के साथ साथ सरकार को इसका आभास हुआ और अब स्थिति सुधर रही है।
प्रश्न- जो ये व्यवहारिक कठिनाइयां आईं उससे लगता है कि ये सचिवालय के बजाय डॉक्टरों के हाथ मे होनी चाहिए। डॉक्टरों का एक दल हो जो सब कुछ तय करे।
उत्तर- बिल्कुल, ये बहुत पहले से हमलोग कहते आ रहे हैं जैसे पल्मोनरी मेडिसिन डिपार्टमेंट, इम्म्युनोलाजी डिपार्टमेंट आदि के एक्सपर्ट डॉक्टर की कमेटी बनाकर सलाह लेनी चाहिए। ये शुरू से होता तो बेहतर स्थिति होती। डॉक्टर ही महामारी को ठीक करता है तो उससे सुझाव लेना चाहिए।
प्रश्न- आईएमए के साथ अब तक क्यों नहीं संवाद हुआ।
उत्तर- मुख्यमंत्री की ओर से बीच बीच में आईएमए के साथ संवाद हुआ। लेकिन प्रोटोकॉल ऐसे थे जैसे ओपीडी खोलने की इजाज़त नहीं थी। इससे दिक्कतें खड़ी हुई। लेकिन अब संख्या बढ़ रही है तो बिना निजी क्षेत्र के इलाज संभव नहीं है तो अब हमलोग को छूट मिलना शुरू हो रही है।
प्रश्न- आपका कोई डेलिगेशन मुख्यमंत्री से मिला?
उत्तर- यूपीआईएमए का लगतार संवाद बना हुआ है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हुई है, संवाद चलता रहा है। हमारे यूपीआईएमए के डाक्टर अशोक जैन सहित अन्य वरिष्ठ डॉक्टरों से संवाद हुआ है। लेकिन जैसे जैसे टेस्टिंग की संख्या बढ़ी, कोरोना संक्रमितों की भी संख्या बढ़ी, स्थिति हाथ से निकलने लगी। हमने निजी क्षेत्र के हस्तक्षेप की डिमांड की, उसपर अमल होना शुरू हुआ है। उम्मीद है बेहतर होगा।
प्रश्न- यानि काफी देर हुई लेकिन अब उम्मीद है कि सुधर जाएगा ।
उत्तर- हां, बिल्कुल हमलोग आशान्वित हैं। प्रोटोकॉल के बंधन में हमें न बांधा जाए तो निजी क्षेत्र के डॉक्टर कोविड को पूरी तरह से काबू कर सकते हैं।





