सरकार के खिलाफ अर्द्धनग्न होने को मजबूर टीचर, बच्चों संग प्रदर्शन में उतरीं महिला शिक्षामित्र

आंदोलन के छठवें दिन शिक्षामित्रों ने अर्द्धनग्न होकर जुलूस निकाला और केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हमीरपुर में 10 मिनट तक बस स्टैंड तिराहे पर सांकेतिक जाम लगाया। प्रदर्शन के दौरान एक शिक्षामित्र अर्चना बेहोश गई। बेहोश हुई शिक्षामित्र को लेकर दो लोगों ने नाटक करने की बात कही तो महिला शिक्षामित्रों ने उनकी चप्पल से पिटाई कर दी।  बांदा में कई घंटे धरने के बाद जुलूस में निकल पड़े शिक्षा मित्रों ने धरना देकर नेशनल हाईवे भी जाम कर दिया। प्रशासन और पुलिस को उन्हें हटाने में पसीने छूट गए। कलक्ट्रेट में ज्ञापन देने के बाद प्रदर्शन का समापन हुआ।
सरकार के खिलाफ अर्द्धनग्न होने को मजबूर टीचर, बच्चों संग प्रदर्शन में उतरीं महिला शिक्षामित्र
बांदा में शिक्षामित्रों के आंदोलन की शुरूआत राष्ट्रगान से हुई। धरना-प्रदर्शन के साथ ही शिक्षामित्रों की हुई मौतों पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। उधर, जुलूस में शामिल अधिकांश महिला शिक्षामित्र धूप से बचाव के लिए छाता लिए रहीं। जुलूस के लंबे रास्ते और धूप से पस्त शिक्षामित्र कलक्ट्रेट पहुंचते ही पानी की तलाश में जुट गए। यह नजारा देख अफसरों ने तुरंत शिक्षामित्रों को पानी की व्यवस्था कराई।बांदा में शिक्षामित्र से समायोजित हुए शिक्षकों का आंदोलन बीएसए कार्यालय में जारी है। सुबह से शुरू हुआ धरना दोपहर तीन बजे तक जारी रहा। इस दौरान वक्ताओं ने केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। इसके बाद शिक्षामित्रों ने अर्द्धनग्न होकर जुलूस निकाला।

जुलूस सुभाष बाजार से श्रीविद्या मंदिर होता हुआ बस स्टैंड पहुंचा। जहां उन्होंने 10 मिनट का सांकेतिक जाम लगाया। इस दौरान काफी वाहन जाम में फंसे रहे। इसके बाद शिक्षामित्रों ने कलक्ट्रेट जाकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। जाम के बाद जब शिक्षामित्र कलक्ट्रेट के अंदर प्रवेश कर रहे थे तभी एक शिक्षामित्र बेहोश हो गई। वहां से गुजर रहे लोगों ने मखौल उड़ाते हुए कहा कि बेहोश होने का नाटक करना बंद करो। यह बात सुन अन्य महिला शिक्षामित्रों ने उसकी चप्पलों से पिटाई कर दी। इसी के कुछ देर बाद एक और टाइपिस्ट ने फब्तियां कस दी जिससे उससे भी नोकझोंक हो गई।

सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करते शिक्षामित्र

सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजन खारिज कर देने पर आंदोलन कर रहे शिक्षा मित्रों ने सोमवार को दूसरी बार प्रदर्शन के साथ हंगामा किया। बांदा में कई घंटे धरने के बाद जुलूस में निकल पड़े शिक्षा मित्रों ने धरना देकर नेशनल हाईवे भी जाम कर दिया। प्रशासन और पुलिस को उन्हें हटाने में पसीने छूट गए। कलक्ट्रेट में ज्ञापन देने के बाद प्रदर्शन का समापन हुआ। शिक्षा मित्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें सड़कों पर लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं। इन दोनों ने सुप्रीम कोर्ट में गंभीर और प्रभावी पैरवी नहीं की।

तीन दिन के अंतराल में सोमवार दूसरी बार जिले भर के महिला-पुरुष शिक्षामित्रों का जीआईसी मैदान में जमघट शुरू हो गया। संयुक्त शिक्षामित्र संघर्ष मोर्चा बैनर तले बड़ी तादाद में उमड़े महिला और पुरुष शिक्षा मित्रों ने खुली धूप में जीआईसी ग्राउंड में धरना दिया। शिक्षामित्र संघ और शिक्षक नेताओं ने मंच से संबोधित किया। तीन घंटे से ज्यादा यहां धरना और सभा चली। सभा के बाद शिक्षा मित्रों का हुजूम जुलूस की शक्ल में कलक्ट्रेट की ओर चल पड़ा। रास्ते में पुराने ओवरब्रिज पर हाइवे में फिर धरना शुरू कर दिया। हालांकि प्रशासन और पुलिस अधिकारियों समेत पीएसी और पुलिस फोर्स हंगामे से निपटने के लिए पूरी तैयारी से मौजूद था। अफसरों के मनाने पर लगभग एक घंटे बाद हाईवे खाली कर शिक्षा मित्र कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां धरना सभा में जिलाध्यक्ष दिनकर अवस्थी ने आरोप लगाया कि शिक्षा मित्रों को सड़क पर लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं। इन दोनों ने सुप्रीम कोर्ट में प्रभावशाली और गंभीर पैरवी नहीं की। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ जिलाध्यक्ष राधेश्याम यादव व महामंत्री सुनील मिश्रा ने कहा कि समायोजन रद्द होने से 1.72 लाख शिक्षामित्रों का भविष्य दांव पर है।

कलक्ट्रेट में टाइपिस्ट से बहस करती शिक्षामित्र।

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल व मुख्यमंत्री को संबोधित दो सूत्री ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट रमेशचंद्र तिवारी को सौंपा। चेतावनी दी कि समाधान न होने तक शिक्षामित्रों का आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही शिक्षा मित्र स्कूल सहित सभी ड्यूटियों का बहिष्कार जारी रखेंगे। प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी भी शिक्षा मित्रों के समर्थन में जीआईसी ग्राउंड पहुंचे। प्रदर्शन और ज्ञापन में दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष मूलचंद्र सोनी, महामंत्री महेंद्र विश्वकर्मा समेत राजकरन साहू, राजाभइया पांडेय, रामकरन, जितेंद्र अग्रहरि, अवधेश पांडेय, योगेश्वर गर्ग, राम सिंह, राममिलन द्विवेदी, राजेंद्र शिवहरे, बृजेश सिंह गौतम, इंतसार अहमद, सबलराज यादव, सुजीत नामदेव, विष्णुकांत त्रिवेदी, बृजेश भदौरिया, अखिलेश चतुर्वेदी, देवेंद्र मिश्र, संगीता, सरोज, रेखा, अनीता, मीना, कृष्णा, सविता, सुनीता, पूजा, विमला, प्रीती, सोना, लक्ष्मी, शशिकला, गीता, रमेश, जनार्दन आदि शामिल रहे। एसडीएम सदर प्रहलाद सिंह, डिप्टी कलेक्टर मंसूर अहमद, तहसीलदार सुनील कुमार, अपर एसपी अजय प्रताप, क्षेत्राधिकारी नगर शोहराब आलम, प्रभारी निरीक्षक डीपी तिवारी समेत भारी पुलिस बल मौजूद रहा। उधर, जुलूस से शहर की यातायात व्यवस्था चरमरा गई। जगह-जगह जाम लगा।

धूप और गर्मी में बेहोश शिक्षा मित्र को संभालती साथी महिला।

बांदा में उमस और गर्मी के चलते धरना-प्रदर्शन में शामिल 11 महिला शिक्षामित्र बेहोश हो गईं। उन्हें एंबुलेंस और अधिकारियों के वाहनों से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें लक्ष्मी देवी (प्राथमिक विद्यालय, कबरा पुरवा, तिंदवारी), गीता कुशवाहा (प्राथमिक विद्यालय, अतर्रा ग्रामीण), सुधा शुक्ला (प्राथमिक विद्यालय भाग-एक, तिंदवारी), गीता (प्राथमिक विद्यालय, बाघा, बिसंडा), जानकी तोमर (प्राथमिक विद्यालय, गड़ांव, बिसंडा), नीरजलता (प्राथमिक विद्यालय, लोधन पुरवा, अतर्रा), रामपति (प्राथमिक विद्यालय-भाग-एक, जबरापुर, नरैनी), सुखलाल (प्राथमिक विद्यालय, हुुकुम सिंह का डेरा, तिंदवारी), चंपा देवी (प्राथमिक विद्यालय, सौंता), शीला सिंह (प्राथमिक विद्यालय, बघना पुरवा, नरैनी) व संतोषी देवी (प्राथमिक विद्यालय, बरकोला, नरैनी) शामिल हैं। उधर, तमाम प्रदर्शनकारी शिक्षामित्र गोद में बच्चे लिए थीं। भूख और भीड़ से बिलबिलाते बच्चे रोते रहे। लेकिन हक के शिक्षामित्र मां आंदोलन में डटी रहीं। एसडीएम सदर प्रहलाद सिंह ने बताया कि शिक्षामित्रों के हुजूम के मद्देनजर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई थी।
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