संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक: शताब्दी के बाद पहला बड़ा मंथन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय कार्यकारिणी मंडल की तीन दिवसीय बैठक 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक जबलपुर में होगी। संघ की शताब्दी वर्ष के बाद यह पहला बड़ा चिंतन सत्र है, जिसमें सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले समेत शीर्ष नेतृत्व 2026 तक के संगठनात्मक लक्ष्यों पर रणनीति तैयार करेगा। संघ प्रमुख डॉ. भागवत सोमवार को ही जबलपुर पहुंच गए और बैठक स्थल का जायजा लिया। सभी 46 प्रांतों के प्रमुख पदाधिकारी, सह-कार्यवाह और क्षेत्रीय समन्वयक इस सम्मेलन में शामिल होंगे।

जमीनी कार्यों की समीक्षा, 2026 तक पूर्ण प्रखंड कवरेज लक्ष्य
संघ सूत्रों के अनुसार, शताब्दी वर्ष में चलाए गए कार्यक्रमों की गहन समीक्षा होगी। जमीनी स्तर पर सबसे प्रभावी प्रकल्पों की पहचान और कमजोर क्षेत्रों में सुधार पर फोकस रहेगा। 2026 तक हर प्रखंड में सक्रिय शाखा स्थापित करना मुख्य लक्ष्य है। बैठक में सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, ग्राम विकास, परिवार प्रबोधन जैसे मुद्दों पर भी गहन चर्चा होगी। सेवा प्रकल्पों की संख्या बढ़ाने और राष्ट्रीय जीवन में संघ की भूमिका को मजबूत करने की रणनीति बनेगी।

धर्मांतरण वाले 84 प्रखंडों पर विशेष नजर
मध्य प्रदेश के उन 84 प्रखंडों में जहां धर्मांतरण की गतिविधियां बढ़ी हैं, वहां संघ के कार्यों की विशेष समीक्षा होगी। इन क्षेत्रों में जागरूकता अभियान को और तेज करने के निर्देश पहले ही जारी हो चुके हैं। नेतृत्व इन इलाकों में स्थानीय स्तर पर प्रभावी हस्तक्षेप की योजना बनाएगा।

अगले दशक की नींव यहीं पड़ेगी
यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि संघ शताब्दी के बाद अगले दशक की दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहा है। संगठन विस्तार, सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण में संघ की भूमिका को मजबूत करने की ठोस रूपरेखा यहीं तैयार होगी।

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