संकष्टी चतुर्थी आज, इस विधि से करें पूजा, नोट करें भोग और मंत्र

आज संकष्टी चतुर्थी मनाई जा रही है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह दिन भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त इस दिन (Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026) पूरी भक्ति से व्रत और पूजन करते हैं, उनके जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो प्रकार हैं –

पूजा विधि (Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026 Puja Vidhi)
सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें और भगवान गणेश का ध्यान करें।
एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं।
अक्षत, फूल, चंदन और धूप-दीप अर्पित करें।
बप्पा को दूर्वा अति प्रिय है, इसलिए उन्हें 21 दूर्वा की गांठें जरूर चढ़ाएं।
संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। अंत में कपूर से आरती करें।
संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूरा माना जाता है। ऐसे में रात में चंद्रमा निकलने पर जल, दूध और अक्षत से अर्घ्य दें।
अंत में पूजा के दौरान हुई सभी गलतियों के लिए माफी मांगे।

बप्पा के प्रिय भोग (Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026 Bhog)
मोदक – यह गणेश जी का सबसे प्रिय भोग है। ऐसे में आप बप्पा को मोदक का भोग जरूर लगाएं।
मोतीचूर के लड्डू – अगर मोदक न मिल पाए, तो गणेश जी को बूंदी या मोतीचूर के लड्डू चढ़ाएं।
ऋतु फल – इस दिन केले और नारियल का भोग लगाना भी बेहद शुभ माना जाता है।

पूजन मंत्र (Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026 Mantra)
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

Back to top button