लेह: सात दशकों बाद लद्दाख में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का होगा सार्वजनिक दर्शन

एलएएचडीसी लेह के पूर्व चेयरमैन अधिवक्ता ताशी ग्याल्सन ने लद्दाख के उपराज्यपाल कवींदर गुप्ता से मुलाकात कर भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को लद्दाख में सार्वजनिक दर्शन के लिए लाने के ऐतिहासिक निर्णय पर आभार व्यक्त किया। यह निर्णय केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन, पार्टी नेतृत्व और धार्मिक संगठनों के एक वर्ष से अधिक समय तक चले सतत प्रयासों का परिणाम है।
ताशी ग्याल्सन ने उपराज्यपाल की निर्णायक भूमिका की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने लगातार इस मुद्दे को नई दिल्ली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष उठाया। उनके सक्रिय मार्गदर्शन और प्रशासनिक सहयोग से लद्दाख के लोगों की लंबे समय से संजोई गई आकांक्षा साकार हो पाई।
भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का लद्दाख में सार्वजनिक दर्शन लगभग 75 वर्षों के बाद आयोजित होगा, जो मई 1950 में हुए पिछले पावन अवसर की स्मृति को पुनर्जीवित करेगा। यह अवसर विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, भिक्षुओं, भिक्षुणियों, दिव्यांगजनों और उन श्रद्धालुओं के लिए लाभकारी होगा, जो अन्यत्र जाकर दर्शन नहीं कर सकते।
ताशी ग्याल्सन ने कहा कि यह आयोजन लद्दाख के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जीवन में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा और बुद्ध धर्म तथा भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत के साथ क्षेत्र के प्राचीन संबंधों को और मजबूत करेगा। उन्होंने सभी धार्मिक और सामुदायिक संगठनों के प्रयासों की सराहना की और कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
इस पहल के माध्यम से भगवान बुद्ध का आशीर्वाद हिमालयी सीमांत के दूर-दराज क्षेत्रों तक पहुंचेगा और लद्दाख को भारत और विश्व के बौद्ध समुदाय के लिए प्रमुख तीर्थ एवं आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।





