लिस्टिंग और सेटलमेंट से जुड़े नियमों में बदलाव करेगा सेबी

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि नियामक पीएमएस, एलओडीआर और सेटलमेंट नियमों की समीक्षा करेगा और इस पर जून तक कंसल्टेशन पेपर जारी हो सकता है। साथ ही सेबी बाजार निगरानी के लिए एआई के उपयोग और कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स विकसित करने पर भी काम कर रहा है।
सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि नियामक पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS), लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) नियमों और सेटलमेंट से जुड़े प्रावधानों की व्यापक समीक्षा करेगा। उन्होंने संकेत दिया कि इस संबंध में एक कंसल्टेशन पेपर जून तक जारी किया जा सकता है।
पोर्टफोलियो मैनेजर्स कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए पांडेय ने कहा कि पीएमएस फ्रेमवर्क में निवेशक हित सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इस सेगमेंट में पारदर्शिता पहले की तुलना में बेहतर हुई है, लेकिन बाजार में तेजी से हो रहे बदलाव और नए निवेश उत्पादों के उभरने के कारण मौजूदा नियमों की समीक्षा जरूरी हो गई है।
उन्होंने कहा कि सेबी केवल पीएमएस ही नहीं, बल्कि एलओडीआर और सेटलमेंट से जुड़े नियामकीय ढांचे की भी समीक्षा करेगा, ताकि बदलते बाजार परिदृश्य के अनुरूप नियमों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
एआई के उपयोग पर पांडे ने कहा कि सेबी बाजार में गड़बड़ियों और अनियमितताओं का वास्तविक समय में पता लगाने के लिए एआई के इस्तेमाल की संभावनाओं पर काम कर रहा है, जिससे समय रहते नियामकीय हस्तक्षेप और समाधान संभव हो सके।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सेबी और भारतीय रिजर्व बैंक मिलकर बाजार की गहराई बढ़ाने के उद्देश्य से कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स और उससे जुड़े उत्पाद विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिन्हें एक्सचेंज पर ट्रेड किया जा सकेगा। इससे निवेशकों को निवेश के अधिक विकल्प मिलेंगे और बॉन्ड बाजार को भी मजबूती मिलेगी।
ट्रेडिंग से जुड़ी फंडिंग व्यवस्था पर भी पांडेय ने बदलाव के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि आरबीआई के लेंडिंग नियमों की समीक्षा की जाएगी और इस पर सेबी अपनी राय केंद्रीय बैंक के साथ साझा करेगा। इससे यह संकेत मिलता है कि मार्जिन ट्रेडिंग या उधार लेकर ट्रेडिंग से जुड़े नियमों को और सख्त किया जा सकता है।
पांडेय ने यह भी कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। तेज आर्थिक वृद्धि के साथ देश में निवेशकों की संख्या बढ़ेगी, जिसे ध्यान में रखते हुए नियामकीय ढांचे को मजबूत और निवेशक-केंद्रित बनाना आवश्यक है।





