लंदन से पढ़ाई, इंडिया में नौकरी; रिटायरमेंट के बाद शुरू किया बिजनेस और खड़ी कर दी HDFC!

भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक HDFC इस समय चर्चा में है। चर्चा का कारण पार्ट टाइम चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती का इस्तीफा है। इसका असर इतना हुआ कि शेयर बाजार में HDFC Bank के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई। इस्तीफे की खबर और शेयरों की गिरावट के बीच हम सबको एक कहानी जाननी चाहिए। वो कहानी है एचडीएफसी बैंक के निर्माण की नींव रखने वाले हसमुखभाई पारेख की।
इन्हीं की दूरदर्शी सोच ने भारत को पहली हाउसिंग फाइनेंस कंपनी दी और फिर आगे चलकर यह कंपनी भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट बैंक भी बनी। आज जागरण बिजनेस में जानेंगे कि कैसे हसमुखभाई पारेख ने रिटायरमेंट के बाद HDFC लिमिटेड की शुरुआत की और फिर कैसे आगे चलकर उनके भतीजे दीपक पारेख ने कमान संभाली और बैंकिंग सेक्टर में भी कदम रखकर HDFC Bank को भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक बना दिया।
चॉल में बीता बचपन और लंदन से की पढ़ाई
हसमुखभाई पारेख का जन्म 10 मार्च 1911 को गुजरात के सूरत में हुआ था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी इसलिए वह दिन में पढ़ाई करते थे और रात में काम। आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में स्कॉलरशिप मिली। वहीं से उन्होंने फाइनेंस का गुणा गणित सीखा और फिर भारत वापस आ गए।
2 साल तक कॉलेज में पढ़ाया फिर कॉर्पोरेट जॉब में घुसे
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई करके हसमुखभाई पारेख भारत लौटे और मुंबई के एक कॉलेज में पढ़ाना शुरू कर दिया। लेकिन उनका मन नहीं लग रहा था। 2 साल तक इकोनॉमिक्स पढ़ाने के बाद उन्होंने एक स्टॉक ब्रोकिंग फर्म ज्वाइन की। यहां उन्होंने शेयर बाजार और फाइनेंस की समझ को और मजबूत किया। इसके बाद 1956 में उन्होंने ICICI लिमिटेड ज्वाइन किया।
ICICI में उन्होंने शानदार काम किया, लेकिन उन्हें इस बात का हमेशा मलाल रहता था कि ये बड़े संस्थान सिर्फ अमीरों को ही लोन देते है। बिजनेसमैन को ही लोन देते हैं। लेकिन गरीबों को घर बनाने के लिए भारत में कोई लोन नहीं देता।
रिटायरमेंट के बाद शुरू की HDFC लिमिटेड
हसमुखभाई पारेख 1976 में रिटायर हुए। इसके बाद उन्होंने अमेरिका और यूरोप की तर्ज पर भारत में भी घर खरीदने या बनाने के लिए होम लोन देने का बिजनेस शुरू करने की सोची। उन्होंने पूरी स्ट्रैटिजी बनाई और तब के तत्कालीन वित्त सचिव रहे डॉक्टर मनमोहन सिंह से मुलाकात की। डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत में होम लोन का कॉन्सेप्ट बिल्कुल नया है। इसके चलने की संभावना कम है। इसके बावजूद हसमुखभाई पारेख ने 1977 में HDFC की शुरुआत कर दी।
भतीजे को बुलाया और थमा दी कमान
हसमुखभाई पारेख ने HDF की शुरुआत करने के बाद विदेशी बैंक में काम कर रहे अपने भतीजे दीपक पारेख को बुलाया और उन्हें कमान थमा दी। दीपक को इंटरनेशनल बैंक में काम करने का अच्छा अनुभव था। उन्होंने कंपनी को अच्छी तरीके से चलाया।
1995 में शुरू हुआ HDFC Bank
1990 में हुए खाड़ी युद्ध की वजह से HDFC का प्रॉफिट गिरने लगा। इससी वजह से HDFC को बैंकों से लोन मिलने में दिक्कत आने लगी। इसी दौरान 1991 में भारत में LPG रिफॉर्म हुए। LPG यानी Liberalisation, Privatisation, और Globalisation। इससे प्राइवेट सेक्टर को भी बैंकिंग लाइसेंस मिल गया। इसके बाद दीपक पारेख ने HDFC बोर्ड को इसके लिए मनाया और HDFC से अलग HDFC बैंक की शुरुआत हुई। दोनों अलग-अलग एंटिटी थी।
1994 में, हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन (HDFC) को एक निजी क्षेत्र का बैंक स्थापित करने के लिए RBI से ‘सैद्धांतिक’ मंजूरी मिली। अगस्त 1994 में ‘HDFC बैंक लिमिटेड’ के रूप में निगमित होने के बाद, हमें जनवरी 1995 में अपना बैंकिंग लाइसेंस प्राप्त हुआ।
फरवरी 1995 में, HDFC बैंक ने अपना पहला कॉर्पोरेट ऑफिस और एक फुल-सर्विस ब्रांच, मुंबई के बीचों-बीच वर्ली में सैंडोज हाउस में खोला। इस ऑफिस का उद्घाटन उस समय के केंद्रीय वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने किया था। कॉर्पोरेट ऑफिस के अलावा, यहां लॉकर सेक्शन, बैंकिंग हॉल, डीलिंग रूम और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी हॉल भी थे।
55 गुना ओवरसब्सक्राइब हुआ था HDFC Bank का IPO
मार्च 1995 में, HDFC बैंक ने अपना पहला IPO ₹500 मिलियन (₹10 प्रति शेयर की दर से 50,000,000 इक्विटी शेयर) का लॉन्च किया। काफी शंकाओं के बावजूद, बाजार ने इस इश्यू को हाथों-हाथ लिया और इसे 55 गुना ओवरसब्सक्रिप्शन मिला। इस IPO इश्यू के दो महीने के भीतर ही, बैंक के शेयर 300 प्रतिशत के प्रीमियम पर ट्रेड करने लगे थे।
लिस्टिंग की एक लंबी और कठिन प्रक्रिया के बाद, HDFC Bank मई 1995 में ₹39.95 पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुआ। नवंबर में यह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुए।
1994 में हुआ हसमुखभाई पारेख का निधन
देश को पहली हाउसिंग लोन कंपनी देने वाले हसमुखभाई पारेख का निधन 18 नवंबर 1994 में हुआ। पारेख जी की ही देन है कि आज HDFC भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक है। उनकी सोच की वजह से ही HDFC Bank का जन्म हुआ था।
2023 में हुआ मर्जर
HDFC Ltd का HDFC Bank के साथ 1 जुलाई, 2023 से विलय हो गया, जिससे अरबों की संपत्ति वाली एक विशाल वित्तीय सेवा कंपनी बन गई। इस अरबों के अधिग्रहण ने HDFC Bank को दुनिया के सबसे ज्यादा वैल्यू वाले बैंकों में से एक बना दिया है। इस समय HDFC Bank का मार्केट कैप 12,40,670.76 करोड़ रुपये है।





