रौऊफ अहमद ने पर्यटकों को बचाने का प्रयास में हारा जिंदगी की जंग

पहलगाम से करीब सात किलोमीटर दूर लिद्दर किनारे बसे यन्नर गांव में शुक्रवार की रात से ही कोहराम मचा हुआ था। सभी दुआ कर रहे थे कि अनहोनी टल जाए और रौऊफ अहमद पानी की तेज लहरों से दौड़ता हुआ बाहर आ जाए। रात कैसे आंखों में कट गई,किसी को पता नहीं चला। दिन निकल आया, लेकिन दुआ कबूल नहीं हुई और अनहोनी हाे गई। लिद्दर की लहरों ने रौऊफ को छोड़ दिया, लेकिन निर्जीव। पर्यटकों को लिददर की उफनती लहरों से बचाते वह खुद उनसे हार गया। हारने के बावजूद वह कश्मीर की सदियों पुरानी मेहमानवाजी की परंपरा काे जिंदा रखने की जंग जीत गया।
क्या हुआ रौऊफ अहमद के साथ
रौऊफ अहमद और उसका एक साथी शुक्रवार की शाम को दो विदेशी और पांच देशी पर्यटकों के साथ पहलगाम के मावूरा इलाके में लिद्दर दरिया में वाटर राफ्टिंग कर रहे थे। शाम सात बजे के करीब अचानक मौसम बदल गया। तेज हवाएं चलने लगी, पहले से ही उफनती लिद्दर की लहरें हवा के वेग से और उछलने लगी। किश्ती पलट गई और फिर उसमें सवार पर्यटक तेज लहरों में बहने लगे। रौऊफ अहमद और उसके साथी जो खुद पानी में थे, ने किसी तरह खुद को संभाला और डूब रहे पर्यटकों को किसी तरह से बचाना शुरु कर दिया। रौऊफ अहमद ने एक-एक कर पर्यटकों को किनारे तक पहुंचाना शुरु कर दिया इसी दौरान एसडीआरएफ और पुलिस के बचावकर्मी भी दरियां में कूद पड़े।। पर्यटक तो बच गए, लेकिन लिद्दर की तेज लहरों से लड़ते हुए रौऊफ थक गया और बाहर नहीं निकल पाया। पानी उसे अपने साथ बहा ले गया। बचावकर्मियों ने उसे पूरी रात तलाश किया। लेकिन वह कहीं नहीं मिला। आज सुबह अमाड जू के पास भवानी पुल के नीचे उसका शव मिला।
कौन है रौऊफ अहमद
रौऊफ अहमद बीते एक दशक से भी ज्यादा समय से पहलगाम आने वाले पर्यटकों के लिए बतौर गाईड काम कर रहा था। ट्रैकिंग पर जाने वाले पर्यटकों से लेकर रीवर राफ्टिंग के शौकीनों के लिए वह हमेशा पहली पसंद होता था। वह पहलगाम के यन्नर गांव का रहने वाला था। पहलगाम में एक होटल आपरेटर अबरार अहमद ने कहा कि मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि वह डूब गया। उसने कई बार नहीं कई बार ऐसे हादसों में अपनी बहादुरी दिखायी है। कई बार हमारे होटल में रुके पर्यटक उसके साथ राफ्टिंग के लिए गए हैं। उसके साथ जाने का मतलब सुरक्षा की गारंटी होता था। लेकिन खुदा ने उसकी हिफाजत क्यों नहीं की, यह खुदा ही जानता है।
वह मरा नहीं, शहीद हुआ है
अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद रौऊफ का शव करीब दस बजे उसके परिजनों के हवाले किया गया। शव जैसे ही उसके गांव में पहुंचा, पूरे गांव में रात से बना गम का माहौल और ज्यादा गमजदा हो गया। गावं में डराने वाली खामोशी थी, जो उसके घर से आने वाली रोने की आवाजों से टूट रही थी। उसके परिवार में कोई उसकी मौत पर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रह था। उसके एक पड़ोसी अशरफ डार जो कथित तौर पर उसके करीबी रिश्तेदार हैं, ने कहा कि हमारे साथ तो बहुत बुरा हुआ। पता नहीं खुदा ने ऐसा क्यों किया। लेकिन यह मत कहिए कि वह डूब कर मर गया।मेहमान खुदा का भेजा फरिश्ता है, उसकी खातिरदारी और हिफाजत करना हमारा फर्ज है। यहां आने वाले टूरिस्ट हमारे मेहमान होते हैं, उनकी हिफाजत हमारी रिवायत है। कश्मीर और कश्मीरी अपनी इसी रिवायत के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं। रौऊफ डूबा नहीं है, वह मरा नहीं है, वह शहीद हुआ है।
राज्य सरकार करेगी सम्मानित
राज्यपाल के सलाहकार खुर्शीद अहमद गनई ने रौऊफ अहमद की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि उसने अपनी जान पर खेलकर पर्यटकों को बचाया है। उसने कश्मीर की मेहमाननवाजी की परंपरा का जिंदा रखने के लिए अपनी जान दी है। उसके परिवार की पूरी मदद की जाएगी। रौऊफ अहमद को उसकी बहादुरी के लिए राज्य सरकार द्वारा मरणोपरांत सम्मानित किया जाएगा। मंडलायुक्त कश्मीर बसीर अहमद खान ने दिवंगत रौऊफ के परिजनों की तत्काल मदद के लिए दो लाख रुपये की राशि जारी करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि रौऊफ की बहादुरी को बरसों याद रखा जाएगा। जिला उपायुक्त अनंतनाग खालिद जहांगीर ने कहा कि रौऊफ अहमद को उसकी बहादुरी के लिए पुरस्कृत किया जाएगा।
उमर अब्दुल्ला ने भी सराहा
पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने भी रौऊफ की बहादुरी को सराहा है। उन्होंने उसे श्रद्धांजली अर्पित करते हुए कहा कि बहादुर रौऊफ अहमद डार को मेरा सलाम। उसने दरिया में पलटी किश्ती के कारण डूब रहे पर्यटकों को बचाते हुए अपनी जान दे दी। खुदा उसको जन्नत में सबसे अच्छी जगह दे।





