रिपोर्ट में दावा, देश को होगा 100 अरब डॉलर का नुकसान

नई दिल्ली: कोरोना वायरस का सबसे बुराअसर दुनियाभर के देशों की अर्थव्यस्था पर पड़ रहा है। कोरोना वायरस को हराने के लिए कई देशों में लॉकडाउन लगा हुआ है, जिसके कारण सभी काम ठप से पड़े है। लॉकडाउन का सीधा असर देश की अर्थव्यस्था पर पड़ रहा है। एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने मुताबिक़ भारत में लगे 21 दिन के लॉकडाउन से देश की इकॉनमी को 100 अरब डॉलर का नुक्सान होगा।
हर दिन 4.5 अरब डॉलर का नुकसान
एक्यूट रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ लॉकडाउन के चलते भारतीय अर्त्थव्य्वस्था को हर दिन 4.5 अरब डॉलर यानी करीब 34 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। पिछले तीन-चार दिनों से देश में कोरोना वायरस ने रफ़्तार पकड़ ली है।
दुनिया के एक-तिहाई देशों में लॉकडाउन
कोरना वायरस ने ना कोई देश की सीमा देखी है ना कोई जाति और ना ही कोई धर्म। कोरोना के कहर से कोई भी देश अछूता नहीं रहा है। इसे रोकने के लिए दुनिया के के करीब एक-तिहाई देशों में लॉकडाउन की स्थिति है। इससे दुनियाभर की इकोनॉमी को काफी नुकसान हो रहा है।
पीएम मोदी दे किया था ऐलान
गौरतलब है कि कोरोना के प्रकोप से देश को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को अपने संबोधन में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की थी। इस लॉकडाउन के दौरान 14 अप्रैल तक लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक है। कुछ जरूरी सामान और सेवाओं के अलावा बाकी सभी कारोबार और इंडस्ट्री ठप पड़ गईं।
इन इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा नुकसान
देश में लगे लॉकडाउन से सबसे ज्यादा नुकसान टूर और ट्रैवल, फूड, रियल एस्टेट जैसी इंडस्ट्री को हुआ है। इन इंडस्ट्री का ग्रॉस वैल्यू एडेड यानी जीवीए में करीब 22 फीसदी का योगदान है। इसकी वजह से कई रेटिंग एजेंसियों ने यह अनुमान लगाया है कि इस तिमाही यानी अप्रैल से जून की तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में महज 2 से 3 फीसदी की बढ़त हो सकती है, जबकि मार्च की तिमाही में जीडीपी में 5 फीसदी के आसपास बढ़त होने का अनुमान है।

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