राधा अष्टमी पर बन रहे कई शुभ-अशुभ योग

31 अगस्त 2025 के अनुसार आज राधा अष्टमी का का त्योहार मनाया जा रहा है। इस दिन किशोरी जी पूजा-अर्चना करने का विधान है। इस अवसर पर राधा रानी के मंदिरों में खास रौनक देखने को मिलती है। ऐसे में आइए एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक से जानते हैं आज का पंचांग।
आज यानी 31 अगस्त को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस तिथि पर राधा अष्टमी दूर्वा अष्टमी और मासिक दुर्गाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। साथ ही आज से महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत हो रही है।
यह व्रत 16 दिनों तक किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, राधा अष्टमी के दिन राधा रानी की पूजा करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस बार राधा अष्टमी के दिन कई शुभ-अशुभ योग का निर्माण हो रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग के बारे में।
तिथि: शुक्ल सप्तमी
मास पूर्णिमांत: भाद्रपद
दिन: रविवार
संवत्: 2082
तिथि: 01 सितंबर को अष्टमी रात्रि 12 बजकर 57 मिनट तक
योग: वैधृति दोपहर 03 बजकर 59 मिनट तक
करण: विष्ठि प्रातः 11 बजकर 54 मिनट तक
करण: 01 सितंबर को बव रात्रि 12 बजकर 57 बजे तक
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
सूर्योदय: सुबह 05 बजकर 59 मिनट पर
सूर्यास्त: शाम 06 बजकर 44 मिनट पर
चंद्रमा का उदय: 01 दोपहर बजकर 11 मिनट पर
चन्द्रास्त: रात 11 बजकर 21 मिनट पर
सूर्य राशि: सिंह
चंद्र राशि: वृश्चिक
पक्ष: शुक्ल
शुभ समय अवधि
अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक
अमृत काल: 01 सितंबर को रात्रि 11 बजकर 37 बजे से दोपहर 01 बजकर 23 मिनट तक
अशुभ समय अवधि
राहुकाल: सायं 05 बजकर 08 मिनट से शाम 06 मिनट 44 बजे तक
गुलिकाल: दोपहर 03बजकर 32 मिनट से सांय 05 बजकर 08 बजे तक
यमगण्ड: दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से दोपहर 01 बजकर 57 बजे तक
आज का नक्षत्र
आज चंद्रदेव अनुराधा नक्षत्र में रहेंगे…
अनुराधा नक्षत्र: शाम 05 बजकर 27 मिनट तक
सामान्य विशेषताएं: समाज में सम्मानित, आत्मकेंद्रित, आक्रामक, साहसी, बुद्धिमान, मेहनती, विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित और सुंदर बाल
नक्षत्र स्वामी: शनि
राशि स्वामी: मंगल
देवता: मित्रता के देवता
प्रतीक: अंतिम रेखा पर एक फूल
राधा अष्टमी का धार्मिक महत्व
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी मनाई जाती है। यह दिन श्रीकृष्ण की अनंत प्रेमिका और भक्ति की मूर्ति श्री राधारानी का जन्मोत्सव माना जाता है। श्रीमद्भागवत और पुराणों में वर्णन है कि बरसाना धाम में माता कीर्ति की गोद में राधारानी का अवतरण हुआ।
राधा अष्टमी पर प्रातः स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण किए जाते हैं। इस दिन राधा-कृष्ण की झांकी सजाई जाती है, भजन-कीर्तन होते हैं और राधा रानी की विशेष पूजा की जाती है। भक्तजन उपवास रखते हैं और प्रेमभाव से राधा-कृष्ण के नाम का स्मरण करते हैं।
इस दिन की मान्यता है कि केवल कृष्ण की पूजा करने से उतना फल नहीं मिलता जितना राधा-कृष्ण की संयुक्त आराधना से मिलता है। राधा अष्टमी हमें यह संदेश देती है कि भक्ति का सार केवल प्रेम और समर्पण में है।
राधा अष्टमी अवधि-
अष्टमी तिथि प्रारंभ– 30 अगस्त 2025 को रात 10 बजकर 46 मिनट
अष्टमी तिथि समाप्त– 01 सितम्बर 2025 को रात 12 बजकर 57 मिनट
राधा अष्टमी पूजा विधि-
प्रातः काल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
घर या मंदिर में राधा-कृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
पूजा स्थल को फूलों और दीपक से सजाएं।
कलश स्थापना कर भगवान गणेश का स्मरण करें।
राधारानी और श्रीकृष्ण को पंचामृत स्नान कराएं या जल से शुद्ध करें।
रोली, चावल, फूल, तुलसी दल और सुगंधित वस्त्र अर्पित करें।
राधा-कृष्ण को मिठाई और फलों का भोग लगाएं, विशेषकर खीर और माखन-मिश्री अर्पित करें।
राधा अष्टमी की कथा का श्रवण करें और भजन-कीर्तन करें।
दिनभर उपवास या फलाहार रखें और सायंकाल आरती करके व्रत पूरा करें।





