ये है सुदंरता और रोगों के इलाज की सबसे लाभदायक बूटी, बस ऐसे करें इस्तेमाल

इंदौर।आयुर्वेद के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि के चलते एलोवेरा का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। इस पौधे का उपयोग चेहरे और बाल को संवारने के साथ ही ये पेट के रोगों के लिए रामबाण दवा है। इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए प्रदेश के कई युवा अब इसकी खेती की ओर मुड़ गए हैं। रतलाम जिले में बड़ी संख्या में किसानों ने इस बार एलोवेरा की खेती कर रहे हैं। उनके मुताबिक एक बार लगाने पर इसका पौधा 5 साल तक कमाई देता है। एक एकड़ में ही एक साल में लाख रुपए से ज्यादा की कमाई की जा सकती  है।
ये है सुदंरता और रोगों के इलाज की सबसे लाभदायक बूटी, बस ऐसे करें इस्तेमाल
– धौंसवास के किसान सुरेश पाटीदार ने बताया कि इस बार हमारे क्षेत्र में 27 बीघा से ज्यादा क्षेत्र में एलोवेरा बोया गया है। सुरेश के अनुसार उन्होंने ने साढ़े 12 बीघा में पहली बार एलोवेरा लगाया है। नवरात्रि शुरू होते ही उन्होंने इसकी कटाई शुरू कर दी। पाटीदार के अनुसार धार के धामनोद में एलोवेरा के  जेल बनाने की फैक्टी है। यहां से जैल भारत सहित विश्व के तमाम देशों में जाता है।

 विदेशों में लिवर से जुड़ी दवाइयां बनाने में हो रहा उपयोग

 रूद्राक्ष एलोवरा एग्रो फार्मिंग कंपनी इंदौर के रवींद्र पाटीदार के अनुसार पतंजलि, डाबर, हिमालय जैसी कंपनी के अलावा अमेरिका, साउथ अफ्रीका, ब्राजील, चीन सहित अन्य देशों में भी इसकी डिमांड है। वहां लिवर संबंधी बीमारियों की दवा बनाने में इसका उपयोग होता है।
 देश में इसका ज्यादातर उपयोग कॉस्मेटिक प्रोडक्ट बनाने में किया जाता है। एलोवेरा से बने फेसवाॅश, फेस जेल, शैम्पू, मसाज क्रीम काफी लोकप्रिय हैं। इसके जूस से  कई तरह की दवाइयां बनाई जा रही है।

इस तरह होती है खेती

 – एक बार बोने पर एलोवरा का पौधा पांच साल तक पत्तियां देता है। पाटीदार के अनुसार एक बीघे में बोवनी करने पर करीब 45 से 50 हजार रुपए तक खर्च आता है। एक बीघे में 4 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं। एक पौधा 10 रुपए का आता है। तीन बार निंदाई-गुड़ाई, पानी व फसल कटाई का खर्च करीब 10 हजार रुपए आया। एक पौधे से एक बार में ढाई किलो तक पत्तियां निकलती हैं। इस तरह 4 हजार पौधों से 10 हजार किलो (100 क्विंटल) पत्तियां मिलती हैं। यह 300 रुपए क्विंटल के भाव पर बिकने से 30 हजार रुपए मिलेंगे। साल में तीन फसल लेने लेने पर 90 हजार रुपए प्राप्त होंगी। इस तरह एक साल में 40 हजार का फायदा होगा। अब पांच साल तक पौधा नहीं लगाना पड़ेगा। जून में बोवनी के बाद तीन महीने में पहली कटाई की जा सकती है। 

ये युवा कर रहे खेती

 – धौंसवास में सुरेश पाटीदार 12.5 बीघा, कैलाश जाट 2 बीघा, रतलाम में लक्ष्मीनारायण पाटीदार 3 बीघा, पंचेड़ में कंवरलाल जाट 2.5 बीघा, सोहनगढ़ के पास शंभुलाल पाटीदार 5 बीघा व बड़ायला माताजी में 2 बीघे में एलोवेरा की खेती कर रहे हैं।

एलोविरा के साथ दूसरी खेती भी

 – इन्होंने एलोवरा के साथ सुरजना की फली भी लगाई है। एक बीघा में इसके 500 पौधे लगाए हैं। सालभर में एक पौधे से 10 किलो फली निकलती है। इस तरह एक बीघा में 5000 किलो फली निकलेगी। 20 रुपए किलो के औसत से एक लाख रुपए की अतिरिक्त आय होगी।
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