यूपी के रियल मार्केट के लिए बूस्टर डोज, 12 जिलों में कहां-कहां; कितने बढ़ सकते हैं प्रॉपर्टी के दाम

उत्तर प्रदेश को सबसे लंबे एक्सप्रेसवे की सौगात मिल गई है क्योंकि गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) का शुभारंभ हो चुका है। पीएम मोदी (PM Modi) ने हरदोई में इस हाईटेक एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया। गंगा एक्सप्रेसवे ना सिर्फ एक राजमार्ग है बल्कि यूपी के रियल एस्टेट मार्केट के लिए एक बूस्टर डोज साबित होने वाला है। दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर बड़े पैमाने के मैन्युफेक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलप करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। ऐसे में राज्य के जिन 12 जिलों से होकर यह एक्सप्रेसवे गुजरेगा, वहां प्रॉपर्टी के प्राइस बढ़ना तय माने जा रहे हैं।
गंगा एक्सप्रेसवे से यूपी के प्रॉपर्टी मार्केट में संभावनाओं को लेकर जागरण बिजनेस ने प्रॉपर्टी एक्सपर्ट से खास बात की, और जानना चाहा कि किन जिलों व इलाकों में प्रॉपर्टी के प्राइसेज बढ़ सकते हैं।
इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से बढ़ी डिमांड
Colliers India में नेशनल डायरेक्टर एंड रिसर्च हेड, विमल नादार ने कहा, “गंगा एक्सप्रेसवे पर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से औद्योगिक और स्टोरेज की मांग में तेजी आने की उम्मीद है, जो पूर्वी समर्पित माल ढुलाई कॉरिडोर, राष्ट्रीय जलमार्ग 1 (हल्दिया से वाराणसी तक), यमुना एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जैसी प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं द्वारा संचालित होगी। इस बहुआयामी कनेक्टिविटी से आपूर्ति श्रृंखला की कार्यकुशलता बढ़ने, परिवहन समय कम होने और प्रमुख बाजारों में वेयरहाउसिंग क्लस्टर के विकास को गति मिलने की उम्मीद है।”
विमल नादार ने बताया कि मेरठ, कानपुर और प्रयागराज जैसे शहरों में जहां वेयरहाउसिंग बाजार अपेक्षाकृत असंगठित है, लेकिन अब यहां हायर पोटेंशियल रखने वाले बाजारों में प्रवेश करने के इच्छुक प्रमुख खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा, औद्योगिक स्मार्ट सिटी मिशन जैसी पहलों के माध्यम से विनिर्माण और MSME पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने से अपेक्षित विकास को बल मिलेगा, जिससे राज्य भर में संतुलित आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
रियल एस्टेट डेवलपमेंट फर्म, ORAM ग्रुप के फाउंडर, प्रदीप मिश्रा ने कहा, यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी यूपी को पूर्वी यूपी से जोड़ रहा है, ऐसे में इस पूरे बेल्ट में इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को तेजी से बढ़ावा मिलेगा। मेरठ, शाहजहांपुर और प्रयागराज जिले में प्रॉपर्टी की कीमतों में 30-40 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे में एग्जिट प्वाइंट जहां होंगे, वहीं प्रॉपर्टी की कीमतों में ज्यादा उछाल देखने को मिल सकता है। रेसिडेंशयल के साथ-साथ एग्रीकल्चर लैंड की कीमतें भी बढ़ेंगी। हालांकि, इन जिलों के मास्टर प्लान को देखकर निवेश करना ज्यादा सही होगा क्योंकि इससे डेवलपमेंट को लेकर सरकार प्राथमिकताएं और स्पष्ट होंगी।
उधर, विमल नादार ने कहा कि व्यावसायिक नजरिये से गंगा एक्सप्रेसवे से ‘डिसेंट्रलाइज्ड वर्किंग मॉडल’ को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मेरठ, कानपुर और प्रयागराज जैसे द्वितीय श्रेणी के शहर दिल्ली एनसीआर के प्राथमिक कार्यालय केंद्र के साथ-साथ द्वितीयक कार्यालय केंद्रों के रूप में विकसित हो सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, रेसिडेंशयल प्रॉपर्टी मार्केट में भी तेजी आने की संभावना है, क्योंकि कॉरिडोर के आसपास के क्षेत्रों में आवास की मांग में वृद्धि देखी जा सकती है। शहरी विस्तार से राज्य के द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों में किफायती आवास, भूखंडों और एकीकृत टाउनशिप के विकास को और गति मिल सकती है।





