यूजीसी ने 21 अक्टूबर को पत्र निकालकर दिए निर्देश अन्य कार्यक्रम में भारतीय वेशभूषा पहनने की दी सलाह

खादी और हथकरघा यानी हैंडलूम को बढ़ावा देने के लिए अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने शैक्षणिक संस्थानों के कार्यक्रमों के लिए वेशभूषा तय कर दी है। यूजीसी ने विश्वविद्यालय को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दीक्षांत समारोह, वार्षिक उत्सव समेत प्रत्येक कार्यक्रम में शिक्षक और कर्मचारी खादी से बने परिधान ही पहनें। विश्वविद्यालय को कॉलेजों में इसे अनिवार्य करने की जिम्मेदारी दी है। अधिकारियों की मानें तो इससे भारतीय संस्कृति का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा। खास यह है कि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में पिछले दो बार से दीक्षांत समारोह में खादी से बने वस्त्र ही पहने जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खादी के उपयोग और हथकरघा के पुनरुद्धार पर जोर दे रहे हैं। जिससे इस क्षेत्र में काम करने वालों को आजीविका के अवसर दिए जा सकें। साथ ही भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया जा सके। इसी क्रम में यूजीसी ने 21 अक्टूबर को पत्र निकालकर निर्देश दिए कि दीक्षांत समारोह समेत अन्य कार्यक्रम (वार्षिक उत्सव, स्थापना दिवस, सम्मान समारोह) में भारतीय वेशभूषा पहनने की सलाह दी है।

यूजीसी ने कुलपति को विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त कॉलेजों में भी इसे लागू करवाने को कहा है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त लगभग 280 कॉलेज हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही कॉलेज प्रबंधन को पत्र जारी कर यूजीसी के निर्देशों का पालन करने को कहेंगे। आयोग के सचिव डॉ. रजनीश जैन का कहना है कि खादी और हथकरघा वाले कपड़ों से भारतीय संस्कृति व पहनावे को बढ़ावा मिलेगा। बुनकरों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। मामले में डीएवीवी की कुलपति डॉ. रेणु जैन ने बताया कि वे भी खादी के वस्त्रों का समर्थन करती हैं। यूजीसी के निर्देश के बाद प्रत्येक कार्यक्रम में स्टाफ को यह परिधान ही पहनने के लिए बोलेंगे।

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