यूएन कोर्ट में म्यांमार ने किया रोहिंग्या के नरसंहार से इंकार

म्यांमार ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के शीर्ष कोर्ट में रोहिंग्या मुस्लिमों के नरसंहार के लिए अभियान चलाने के आरोपों से इन्कार किया। उसने कहा कि यह अभियान एक वैध आतंक रोधी अभियान है और यह नरसंहार के समान नहीं है।

म्यांमार के प्रतिनिधि ने कहा कि गांबिया अपने आरोपों को साबित नहीं कर पाया। इस मामले का फैसला बेबुनियाद आरोपों नहीं बल्कि तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।

म्यांमार शुरू किया था ये अभियान

म्यांमार ने एक रोहिंग्या विद्रोही समूह के हमले के बाद 2017 में रखाइन प्रांत में यह अभियान शुरू किया था। अभियान के चलते सात लाख से ज्यादा रोहिंग्या पड़ोसी बांग्लादेश में भाग गए। सुरक्षा बलों पर सामूहिक दुष्कर्म, हत्या और हजारों घरों को फूंकने के आरोप लगाए गए।

म्यांमार ने यूएन कोर्ट में क्या कहा?

यूएन के इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में म्यांमार के प्रतिनिधि को को ह्लाइंग ने कहा, ‘म्यांमार चुपचाप बैठे रहने और उत्तरी रखाइन प्रांत में आतंकियों को खुली छूट देने के लिए बाध्य नहीं है।’

अफ्रीकी देश गांबिया ने 2019 में यूएन कोर्ट में नरसंहार का मामला दायर किया था, जिसमें म्यांमार पर अल्पसंख्यक रोहिंग्या के नरसंहार के आरोप लगाए गए। उसने सोमवार को कोर्ट को बताया था कि म्यांमार के अधिकारियों ने सफाए के लिए रोहिंग्या को निशाना बनाया।

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