युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं मेंटल डिसऑर्डर

भारत के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। आमतौर पर मानसिक बीमारियों को ढलती उम्र की समस्या माना जाता था, लेकिन नए आंकड़े एक अलग ही सच्चाई बयां कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में मानसिक विकार अब सिर्फ अधिक उम्र तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि किशोरों और युवाओं को भी यह बीमारी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है। वर्तमान में, लगभग 60 प्रतिशत मानसिक बीमारियां 35 वर्ष से कम आयु के लोगों में पाई जा रही हैं।

कम उम्र में हो रही है मानसिक विकारों की शुरुआत

हाल ही में ‘इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी’ के एक सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मानसिक बीमारियां अक्सर किशोरावस्था या युवावस्था में ही छिपकर पनपने लगती हैं। उनके अनुसार, इन मानसिक विकारों के शुरू होने की औसत उम्र अब महज 19 से 20 वर्ष के बीच रह गई है।

अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के चौंकाने वाले आंकड़े

‘मॉलिक्यूलर साइकियाट्री’ नामक प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है। सात लाख से अधिक लोगों पर किए गए इस अध्ययन में सामने आया है कि:

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