गया.गया का विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला शुरू हो गया है। देश-विदेश से हजारों की संख्या में पिंड दानी मोक्षधाम पहुंचने लगे हैं। इस बार भी 16 की जगह 15 दिनों का श्राद्ध है। इन 15 दिनों के लिए पितृ हमारे घर में रहेंगे और तर्पण के माध्यम से तृप्त होंगे।
क्या है पितृ पक्ष…
– पितृ पक्ष अपने कुल, परंपरा और पूर्वजों के श्रेष्ठ कार्यों को याद करने और उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लेने का समय है।
– इसमें व्यक्ति का पितरों के प्रति श्रद्धा के साथ अर्पित किया गया ‘तर्पण’ यानी जलदान और ‘पिंडदान’ यानी भोजन का दान श्राद्ध कहलाता है।
गया में पिंडदान से मिलता है मोक्ष
– बिहार के गया को पिंडदान के लिए सबसे पवित्र भूमि माना गया है। यहां श्राद्ध व तर्पण से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
– पौराणिक कथा के अनुसार भगवान राम जब लंका विजय के बाद माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ पुष्पक विमान से अयोध्या के लिए लौट रहे थे तब गया के पहाड़ी की एक चोटी (जिसे आज राम सीता पर्वत कहा जाता है) पर वे विश्राम के लिए रुके थे।
– उसी समय पहाड़ से राजा दशरथ का हाथ निकला था और आवाज आई थी कि बेटा तुम गया कि पवित्र भूमि पर हो मेरे पिंडदान कर दो जिससे मुझे मोक्ष मिल सके। भगवान राम ने उसी पर्वत पर पिता का पिंडदान किया था।
क्या है मोक्ष
– हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार मौत के बाद भी इंसान की आत्मा भौतिकवादी दुनिया में रहती है। मौत के बाद शरीर तो नष्ट हो जाता है, लेकिन लोग अपने आप को दुनिया से अलग नहीं कर पाते।
– परिवार और दोस्तों के प्रति दया और प्यार के चलते आत्मा उनसे जुड़ी रह जाती है। भौतिकवादी दुनिया से इस लगाव के चलते आत्मा अंतिम प्रस्थान नहीं कर पाती, जिसके चलते आत्मा को कई तरह के कष्ट भोगने पड़ते हैं। वह इनसे मुक्ति तो पाना चाहता है, लेकिन ऐसा हो नहीं पाता।
– वे अपने आप को भौतिकवादी दुनिया से अलग नहीं कर पाते। हिंदू मान्यता के अनुसार पिंड दान से आत्मा को अंतिम राहत मिलती है और परम शांति (मोक्ष) के लिए आत्मा के प्रस्थान का मार्ग बनता है।