मुज़फ़्फ़रपुर जेल में मनाया गया शहीद खुदीराम बोस का शहादत दिवस

मुज़फ़्फ़रपुर। मुजफ्फरपुर जेल में मंगलवार को देश की आजादी के लिए पहला बम धमाका करने वाले खुदीराम बोस का शहादत दिवस मनाया गया। इस अवसर पर मुजफ्फरपुर के शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा में उनके सेल और फांसी स्थल पर फूलमाला अर्पित कर उनकी शहादत को नमन किया गया । कोरोना के कारण वहां बाहर से किसी भी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक थी। इस दौरान दो मिनट का मौन रखा गया और शहीद खुदीराम बोस को श्रद्धांजलि दी गई।

आजादी के दीवाने खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी के बलिदान की कहानी मुजफ्फरपुर की मिट्टी में है। आजादी के दोनों दीवाने अत्याचारी अंग्रेज जज किंग्स फोर्ड को मारने के लिए बंगाल से बिहार के मुजफ्फरपुर पहुंचे थे। 30 अप्रैल 1908 को उन्होंने जिले के कंपनी बाग के यूरोपियन क्लब के पास अंग्रेज जज को मारने के लिए बम फेंका था, लेकिन वह बग्घी जज किंग फोर्ट की नहीं थी। उस बग्घी पर अंग्रेज महिला और उसकी बेटी सवार थी जो मारी गई थी।

स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में किशोर खुदीराम ने पहला बम धमाका किया था, जिसकी आवाज मुजफ्फरपुर में 5 किलोमीटर तक सुनी गई थी। इसके बाद से आजादी के आंदोलन को गति मिली। बम फेंकने के बाद दोनों रेलवे लाइन के रास्ते पैदल भागे, जहां खुदीराम बोस पकड़े गए, लेकिन प्रफुल्ल चाकी ने खुद को गोली मार ली और मौत को गले लगा लिया। 8 जून 1908 को उन्हें अदालत में पेश किया गया जिसके बाद पुनः उन्हें 13 जून को मौत की सजा सुनाई गई। 11 अगस्त 1908 को उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया गया तथा अगली सुबह उनका दाह संस्कार इसी जिले में किया गया ।

खुदीराम बोस की शहादत ने युवाओं को क्रांति के लिए तैयार कर दिया। बंगाल के जुलाहे एक खास किस्म की धोती बनाने लगे जिसके किनारे पर खुदीराम लिखा रहता था। स्कूल- कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के यह धोती पहनकर आजादी के गीत गाते थे। खुदीराम बोस का जन्म बंगाल के मिदनापुर के महोबनी में हुआ था। मुजफ्फरपुर जेल में रहने के दौरान खुदीराम बोस ने बांग्ला में अपनी आत्मकथा भी लिखी थी। उन्होंने लिखा था कि पिताजी का घर मिदनापुर से 20 कोस दूर उत्तर पूर्व दिशा में महोबनी नाम के एक छोटे से गांव में है और अपनी आत्मकथा उन्होंने अपने वकील कालीपद बसु को दी थी ।

मुजफ्फरपुर के शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा में आयोजित होने वाली हर वर्ष शहादत समारोह में खुदीराम बोस के पैतृक गांव से लोग और उनके रिश्तेदार आते थे और श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देते थे लेकिन कोरोना को देखते हुए इस बार मुजफ्फरपुर जेल में आयोजित शहीद खुदीराम बोस शहादत समारोह में बाहरी किसी भी व्यक्ति को आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। मुजफ्फरपुर जेल प्रशासन ने इस दौरान जेल अधीक्षक राजीव कुमार सिंह,जेलर सुनील कुमार मौर्य के साथ -साथ जेल में तैनात सभी कर्मचारी शामिल थे।

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